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2 बीवियां, 7 दिन का हिसाब... पंचायत ने पति की पूरी 'वीकली ड्यूटी' तय कर दी; हर हफ्ते 500 रुपये भी अनिवार्य

उत्तर प्रदेश के रामपुर में दो पत्नियों के विवाद में पंचायत का फैसला चर्चा का विषय बन गया है. पंचायत ने पति को पहली पत्नी के लिए हर सप्ताह 500 रुपये और हर महीने राशन देने का निर्णय सुनाया.

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Edited By: Reepu Kumari
2 बीवियां, 7 दिन का हिसाब... पंचायत ने पति की पूरी 'वीकली ड्यूटी' तय कर दी; हर हफ्ते 500 रुपये भी अनिवार्य
Courtesy: ChatGpt

रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक पारिवारिक विवाद पर पंचायत का फैसला लोगों का ध्यान खींच रहा है. मामला दो पत्नियों और उनके बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे से जुड़ा था. कई घंटे चली पंचायत के बाद ऐसा समाधान सामने आया, जिसकी चर्चा अब गांव से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है. फैसले में पति की आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ उसके रहने का साप्ताहिक कार्यक्रम भी तय किया गया. बताया गया कि पहली पत्नी ने पति पर उपेक्षा और खर्च न उठाने का आरोप लगाया था. शिकायत पुलिस तक पहुंचने से पहले दोनों परिवारों और गांव के लोगों ने पंचायत बुलाई. बातचीत के बाद दोनों पक्षों की सहमति से समझौता कराया गया. पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसे लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इस पर लगातार चर्चा हो रही है.

शिकायत के बाद पंचायत में बैठा पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, रामपुर के दढ़ियाल चौकी क्षेत्र में रहने वाली पहली पत्नी ने आरोप लगाया कि उसका पति दूसरी पत्नी के साथ रह रहा है और उसके खर्च की जिम्मेदारी नहीं निभा रहा. शिकायत पुलिस चौकी तक पहुंची, लेकिन कार्रवाई से पहले गांव के जिम्मेदार लोगों ने पंचायत बुला ली. कई घंटे चली बातचीत में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बातें रखीं और समाधान निकालने की कोशिश की गई.

हर सप्ताह 500 रुपये और हर महीने राशन देने का निर्णय

लंबी चर्चा के बाद पंचायत ने फैसला दिया कि पति पहली पत्नी के घर हर महीने राशन पहुंचाएगा. इसके अलावा उसके व्यक्तिगत खर्च के लिए हर सप्ताह 500 रुपये भी देगा. पंचायत का उद्देश्य पहली पत्नी की नियमित आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना था, ताकि उसके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर कोई परेशानी न आए.

पति के लिए तय हुआ सात दिन का पूरा कार्यक्रम

पंचायत ने केवल आर्थिक जिम्मेदारी ही तय नहीं की, बल्कि पति के रहने का साप्ताहिक शेड्यूल भी बनाया. फैसले के अनुसार, वह तीन दिन पहली पत्नी के साथ रहेगा और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ समय बिताएगा. सप्ताह का सातवां दिन उसकी अपनी इच्छा पर छोड़ दिया गया. इसी व्यवस्था की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है.

दो शादियां और चार बेटियों वाला परिवार

मिली जानकारी के मुताबिक, युवक की पहली शादी करीब 14 वर्ष पहले हुई थी. लगभग 10 साल बाद उसने दूसरी शादी कर ली. दोनों पत्नियों से उसकी दो-दो बेटियां हैं. गांव के लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ते विवाद का असर बच्चों पर भी पड़ रहा था. इसी कारण पंचायत ने आपसी सहमति से समझौते का रास्ता अपनाने की कोशिश की.

सोशल मीडिया पर फैसले की हो रही चर्चा

पंचायत का यह निर्णय कानूनी आदेश नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से हुआ सामाजिक समझौता बताया जा रहा है. पहली पत्नी के लिए साप्ताहिक 500 रुपये, मासिक राशन और पति के सात दिन के तय कार्यक्रम जैसी शर्तों ने इस मामले को चर्चा का विषय बना दिया है. सोशल मीडिया पर लोग इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.