अयोध्या में राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्शन पास व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. पूर्व पदाधिकारियों की आईडी निष्क्रिय होने के बाद अब तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट को पास जारी करने का अधिकार दिया गया है. ट्रस्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी श्रद्धालु को दर्शन पास प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी न हो और पूरी व्यवस्था पहले की तरह सुचारु रूप से चलती रहे.
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दर्शन पास प्रणाली को निर्बाध बनाए रखने के लिए तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट को अधिकृत किया है. इन अधिकारियों को पास जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि पहले जिन ID के माध्यम से पास बनते थे, उनके बंद होने का असर श्रद्धालुओं पर न पड़े.
पूर्व महासचिव चंपतराय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र तथा गोपाल राव की आईडी निष्क्रिय होने के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है. ट्रस्ट के अनुसार अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की देखरेख में पास जारी करने की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जिससे दर्शन व्यवस्था लगातार सुचारु बनी रहे.
राम मंदिर में प्रतिदिन करीब 1800 दर्शन पास जारी किए जाते हैं. इन्हें छह अलग-अलग समय स्लॉट में बांटा गया है. प्रत्येक स्लॉट दो घंटे का होता है और उसमें लगभग 300 पास जारी किए जाते हैं. इसी प्रक्रिया में विशिष्ट और सुगम दर्शन पास भी शामिल रहते हैं.
ट्रस्ट ने आरएसएस से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए अलग व्यवस्था बनाए रखी है. विभाग प्रचारक और कार्यालय प्रमुख की संस्तुति पर पास जारी किए जाते हैं. वहीं जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के लिए भी अलग कोटा निर्धारित है, जिससे आवश्यक सरकारी कार्य प्रभावित न हों.
ट्रस्ट का कहना है कि नए बदलाव का उद्देश्य केवल व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाना है. वर्तमान में कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्रदास सहित अन्य अधिकृत पदाधिकारियों के माध्यम से भी विशिष्ट और सुगम दर्शन पास जारी किए जा रहे हैं. इससे श्रद्धालुओं को समय पर सुविधा मिलने और पूरी व्यवस्था बिना किसी रुकावट के संचालित होने की उम्मीद है.