उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक मस्जिद को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने मस्जिद को सरकारी भूमि पर बना अनधिकृत ढांचा मानते हुए 30 दिनों के भीतर परिसर खाली करने का आदेश दिया है. साथ ही सरकारी जमीन पर कथित अनधिकृत कब्जे के एवज में 6.41 करोड़ रुपये की वसूली का भी निर्देश दिया है. यह आदेश उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत पारित किया गया है. मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद का दावा है कि यह मस्जिद करीब 150 वर्ष पुरानी है और आदेश को उच्च अदालत में चुनौती दी जाएगी.
प्रशासन के अनुसार कार्रवाई की शुरुआत विकास त्यागी की शिकायत के बाद हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी भूमि पर मस्जिद का निर्माण कर कब्जा किया गया है. इसके बाद राजस्व विभाग ने जांच कराई और मार्च 2025 में लेखपाल ने मस्जिद के कथित प्रबंधक व मौलवी अब्दुल हमीद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. अप्रैल 2025 में नोटिस जारी किए गए, जबकि जून में संबंधित पक्ष ने अपना जवाब दाखिल किया.
राजस्व विभाग ने अदालत में कहा कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में कलेक्ट्रेट (कचहरी) की सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है. याचिका के अनुसार, यह भवन मूल रूप से मुकदमों में आने वाले लोगों के विश्राम गृह के रूप में बनाया गया था. आरोप है कि बाद में भवन के कमरों पर कब्जा कर वहां नमाज शुरू कर दी गई, कुछ कमरे किराये पर दिए गए और बिना अनुमति निर्माण कर सरकारी भवन के एक हिस्से को धार्मिक स्थल में बदल दिया गया. प्रशासन का यह भी कहना है कि कब्जाधारियों के पास भूमि या भवन पर अधिकार साबित करने वाला कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला.
मस्जिद पक्ष ने अदालत में कहा कि सरकार विवादित संपत्ति पर अपना स्वामित्व साबित नहीं कर सकी है और राजस्व रिकॉर्ड केवल भूमि की स्थिति बताते हैं, स्वामित्व नहीं. उनका आरोप था कि मस्जिद को हटाने के उद्देश्य से याचिका दायर की गई है. हालांकि अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए कहा कि संबंधित पक्ष अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सका. अदालत ने माना कि खसरा संख्या 539 लंबे समय से सरकारी कलेक्ट्रेट भूमि के रूप में दर्ज है, इसलिए कब्जा अनधिकृत है. इसी आधार पर 315 वर्गमीटर भूमि पर लगभग 70 वर्षों के कथित अनधिकृत कब्जे के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति तय की गई.