भारत ने पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बड़ा बयान दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को कहा कि बांग्लादेश सरकार की ओर से भेजा गया प्रत्यर्पण अनुरोध अभी 'विचाराधीन' है और इस पर कानूनी प्रावधानों तथा न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत फैसला लिया जाएगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को प्रत्यर्पण का अनुरोध प्राप्त हुआ है और संबंधित सभी कानूनी पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा.
शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता छोड़ने के पश्चात भारत आ गई थीं और तब से नई दिल्ली में रह रही हैं. नवंबर 2025 में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पहली बार भारत से उनके प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध किया था. इसके बाद अप्रैल 2026 में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार खलीलुर रहमान की भारत यात्रा के दौरान भी ढाका ने शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को वापस भेजने की मांग दोहराई थी.
इस बीच शेख हसीना ने हाल ही में कहा है कि वह दिसंबर के आसपास स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि लौटते ही वह अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी, भले ही उन्हें गिरफ्तारी या मौत का सामना करना पड़े. उन्होंने कहा कि उनके दल अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दमन हो रहा है और यदि मृत्यु भी आए तो वह अपने देश की मिट्टी पर ही आना चाहेंगी, जहां उनके माता-पिता दफन हैं.
बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान कथित मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामले में शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है. इसी फैसले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मृत्युदंड और पूर्व पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पांच वर्ष की सजा सुनाई गई. न्यायाधिकरण ने शेख हसीना और कमाल की संपत्तियां जब्त करने का भी आदेश दिया है. हालांकि, भारत ने फिलहाल केवल इतना कहा है कि प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जा रहा है.