नोएडा: मंगलवार को नोएडा में विरोध प्रदर्शनों की लहर और तेज हो गई, जब रिहायशी सोसायटियों में काम करने वाली नौकरानियों समेत घरेलू कामगारों ने सेक्टर 121 के क्लियो काउंटी में सड़कों पर उतरकर ज्यादा वेतन और बेहतर काम करने की स्थितियों की मांग की. यह विरोध प्रदर्शन फैक्ट्री मजदूरों द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शनों के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिसने पूरे शहर में सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था.
विरोध कर रहे कामगारों के अनुसार उनका वेतन बहुत कम है और बढ़ती महंगाई के हिसाब से बिल्कुल भी नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त छुट्टियां नहीं दी जातीं और अक्सर उनसे जरूरत से ज्यादा काम करवाया जाता है. सड़कों पर इकट्ठा होकर नारे लगा रहे कई प्रदर्शनकारियों ने कहा, 'जब तक हमारा वेतन नहीं बढ़ाया जाएगा, हम काम पर वापस नहीं लौटेंगे.'
उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान मौके पर मौजूद हैं, वे स्थिति पर नजर रख रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे. यह घटनाक्रम 13 अप्रैल को नोएडा में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शन के बाद सामने आया है, जब फैक्ट्री मजदूरों ने वेतन में संशोधन और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया था.
यह आंदोलन कई इलाकों में हिंसक हो गया था, जिनमें फेज 2 और सेक्टर 60 शामिल हैं, जहां आगजनी, तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आई थीं. पुलिस की SUV समेत कई वाहनों में आग लगा दी गई थी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था.
इन विरोध प्रदर्शनों के कारण यातायात में भी भारी बाधाएं आईं और नोएडा को दिल्ली से जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं. अधिकारियों ने औद्योगिक इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया था और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यातायात मार्गों में बदलाव यानी डायवर्जन लागू किए थे.
अधिकारियों ने बताया कि कामगार पड़ोसी राज्य हरियाणा की तर्ज पर वेतन में बढ़ोतरी के साथ-साथ बेहतर ओवरटाइम वेतन और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं. पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है और उन्हें आश्वासन दिया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.
अब जब घरेलू कामगार भी इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं, तो अधिकारी स्थिति पर पैनी नज़र रखे हुए हैं, क्योंकि नोएडा के कई सेक्टरों में अशांति फैलती जा रही है.