नोएडा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है. सेक्टर 30 में रहने वाली एक रिटायर महिला डॉक्टर को टेलीकॉम कंपनी और पुलिस अधिकारी बनकर ठगों ने पांच दिन तक मानसिक दबाव में रखा. आरोपियों ने गिरफ्तारी और धन शोधन मामले में फंसाने का डर दिखाकर उनसे 18.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए. पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है.
पीड़िता मीनाक्षी माथुर के अनुसार 13 जुलाई को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को एक टेलीकॉम कंपनी के मुख्य कार्यालय का कर्मचारी बताया. उसने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर बैंक खाता खोला गया है और उसका उपयोग धन शोधन समेत आपराधिक गतिविधियों में किया गया है.
इसके बाद कॉल को दूसरे व्यक्ति से जोड़ दिया गया, जिसने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताया. उसने कहा कि मामले की जांच चल रही है और गिरफ्तारी हो सकती है. आरोप है कि ठग लगातार वीडियो कॉल पर जुड़े रहे और किसी को जानकारी देने पर तत्काल गिरफ्तारी की धमकी देकर महिला को मानसिक दबाव में रखा.
जांच के नाम पर आरोपियों ने महिला से बैंक खाते, एफडी, डाकघर जमा और अन्य निवेश की जानकारी ले ली. 14 जुलाई को महिला ने एफडी तुड़वाकर 10.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से भेजे. इसके बाद 17 जुलाई को फिर झांसा देकर आठ लाख रुपये और ट्रांसफर करा लिए. इस तरह कुल 18.50 लाख रुपये की ठगी हुई.
पीड़िता की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस बैंक खातों में हुए लेनदेन और रकम के प्रवाह की जांच कर रही है. अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, डिजिटल अरेस्ट या गिरफ्तारी की धमकी मिलने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें और किसी भी खाते में धनराशि ट्रांसफर न करें.
हाल के समय में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. साइबर अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनकी जमा पूंजी हड़प लेते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर पैसे जमा कराने का निर्देश नहीं दिया जाता.