अयोध्या में आयोजित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. सबसे प्रमुख निर्णय डॉ. कृष्ण मोहन को फिलहाल महासचिव का कार्यभार सौंपने का रहा. करीब ढाई घंटे चली बैठक में मंदिर निर्माण, प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रस्ट के भविष्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक मंगलवार को अयोध्या में संपन्न हुई. लगभग ढाई घंटे चली इस बैठक में ट्रस्ट के कई वरिष्ठ सदस्यों ने हिस्सा लिया. बैठक में मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति, प्रशासनिक व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और संगठनात्मक मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. इसी दौरान यह निर्णय लिया गया कि नियमित महासचिव की नियुक्ति होने तक डॉ. कृष्ण मोहन ट्रस्ट के महासचिव का कार्यभार संभालेंगे. ट्रस्ट का मानना है कि इससे प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और सभी योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती रहेंगी.
डॉ. कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के सिकंदरपुर बाजार के निवासी हैं. उनका जन्म सितंबर 1952 में बरेली में हुआ था. उनके पिता भारतीय रेलवे में अधिकारी थे. उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के बाद करीब पांच वर्षों तक उन्होंने परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया. इसके बाद भारतीय वन सेवा (IFS) में उनका चयन हुआ और उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला. वर्ष 2012 में वे अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए. सेवानिवृत्ति के बाद वे सामाजिक कार्यों और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे.
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#WATCH | Ayodhya, Uttar Pradesh: On the meeting of Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust, Krishna Mohan, a trustee of the Shri Ram Janmabhoomi Tirtha Kshetra Trust, says, "... Discussions on irregularities in the donation amount were not done due to the pending final report… pic.twitter.com/OH8iOFl22H
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) July 22, 2026
डॉ. कृष्ण मोहन का नाम उस समय भी चर्चा में आया था जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले में सबसे पहले पुलिस को औपचारिक तहरीर दी गई थी. ट्रस्ट की ओर से इस मामले को गंभीरता से लिया गया था और शिकायत दर्ज कराने की जिम्मेदारी डॉ. कृष्ण मोहन ने निभाई थी. इस कदम को ट्रस्ट की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया था. अब महासचिव का कार्यभार मिलने के बाद उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
महासचिव का कार्यभार संभालने के बाद डॉ. कृष्ण मोहन ट्रस्ट के प्रशासनिक और संगठनात्मक कार्यों की निगरानी करेंगे. श्रद्धालुओं की सुविधाओं, विभिन्न समितियों के समन्वय, मंदिर से जुड़े निर्णयों के क्रियान्वयन और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी. ट्रस्ट की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में कई नई व्यवस्थाओं और योजनाओं पर तेजी से काम किया जाएगा, ताकि राम मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें.
राम मंदिर ट्रस्ट की इस बैठक पर देशभर के श्रद्धालुओं की नजर बनी हुई थी. फिलहाल डॉ. कृष्ण मोहन को महासचिव का कार्यभार सौंपे जाने को एक अंतरिम लेकिन महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है. नियमित महासचिव की नियुक्ति को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. ट्रस्ट की ओर से उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही अन्य प्रशासनिक निर्णयों और बैठक में हुई चर्चाओं की विस्तृत जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी. फिलहाल यह बदलाव मंदिर प्रबंधन को और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.