भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने की दिशा में आईआईटी कानपुर का स्टार्टअप ड्रीम एयरोस्पेस एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है.
संस्थान के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर से जुड़े इस स्टार्टअप को स्वदेशी उपग्रह प्रणोदन तकनीकों के विकास और व्यावसायिक विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये की फंडिंग प्राप्त हुई है. यह निवेश चंडीगढ़ एंजेल्स नेटवर्क की ओर से किया गया है.
ड्रीम एयरोस्पेस अंतरिक्ष यानों और उपग्रहों के लिए पर्यावरण के अनुकूल प्रणोदन प्रणाली विकसित कर रहा है. कंपनी द्वारा विकसित की जा रही एटम सीरीज थ्रस्टर और क्यूबहुड प्रोपल्शन मॉड्यूल को अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है. प्राप्त फंड का उपयोग इन तकनीकों के फ्लाइट क्वालीफिकेशन और परीक्षण प्रक्रियाओं को पूरा करने में किया जाएगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक उपग्रहों को अधिक कुशलता से संचालित करने के साथ-साथ अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे और प्रदूषण की समस्या को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है. वर्तमान में अधिकांश अंतरिक्ष अभियानों में हाइड्राजीन जैसे अत्यधिक विषैले ईंधनों का उपयोग किया जाता है. इसके साथ ही क्यूबहुड प्रोपल्शन मॉड्यूल का पहला इन-ऑर्बिट डेमोंस्ट्रेशन भी प्रस्तावित है, जो इस तकनीक की क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा.
इसी बीच आईआईटी कानपुर के एरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग ने अपने पीएचडी कार्यक्रम के लिए वॉक-इन एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. संस्थान ने योग्य शोधार्थियों को प्रति माह 42 हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है. पंजीकरण प्रक्रिया 16 जून तक जारी रहेगी, जबकि ऑनलाइन साक्षात्कार 18 जून को आयोजित किए जाएंगे. चयनित शोधकर्ताओं को एरोडायनामिक्स, प्रोपल्शन, फ्लाइट डायनेमिक्स एंड कंट्रोल, स्ट्रक्चर्स एंड एयरोइलास्टिसिटी, कंप्यूटेशनल मैकेनिक्स तथा एरो-थर्मोडायनामिक्स जैसे उन्नत क्षेत्रों में अनुसंधान का अवसर मिलेगा.
वहीं दूसरी ओर आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण के लिए एक स्वदेशी और उत्सर्जन-मुक्त प्रायोगिक संयंत्र विकसित किया है. यह संयंत्र प्रतिवर्ष 100 टन इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट, विशेष रूप से प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, का प्रसंस्करण कर सकता है. संस्थान के अनुसार, इस तकनीक के संचालन से मिट्टी, जल या वायु प्रदूषण नहीं होगा. यह संयंत्र ई-कचरे से मूल्यवान धातुओं को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से अलग करने में सक्षम है, जिससे देश में सतत विकास और हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिलेगा.