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India Daily

अमेरिका-ईरान शांति समझौते से दुनिया को बड़ी राहत, होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

अमेरिका-ईरान तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ा. हालांकि अब दोनों देशों के बीच हो रहे समझौते की खबर के तुरंत बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है.

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Edited By: Shanu Sharma
अमेरिका-ईरान शांति समझौते से दुनिया को बड़ी राहत, होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
Courtesy: Pinterest

अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक शांति समझौते पर सहमति बन गई है. इस महत्वपूर्ण डील के ऐलान के साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर लागू अमेरिकी नाकाबंदी को हटाने और इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से पूरी तरह खोलने की घोषणा की, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है और अब होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी बाधा के खोला जा रहा है. उन्होंने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाने की मंजूरी देने की भी घोषणा की.

तेल बाजार में आई बड़ी गिरावट

ट्रंप ने कहा कि अब वैश्विक जहाजरानी और तेल आपूर्ति सामान्य रूप से शुरू हो सकेगी, जिससे दुनिया भर के देशों को राहत मिलेगी. शांति समझौते की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. सोमवार के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में 4.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि WTI क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया. इसके अलावा मुरबन क्रूड का भाव भी 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं के कम होने से बाजार में यह गिरावट देखने को मिली है.

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ा था वैश्विक संकट

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ गया था. इसके जवाब में ईरान ने कई कदम उठाए, जिनमें होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला भी शामिल था. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिने जाने वाले इस समुद्री रास्ते के बंद होने से तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई थी.

इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 से 115 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहीं. इसका असर दुनिया के कई देशों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी देखने को मिला. अब शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने के बाद ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद बढ़ गई है.