नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है. हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त बाबा नीम करौली बाबा के दर्शन के लिए यहां पहुंच रहे हैं.
मेले के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने 14 और 15 जून को कैंची धाम क्षेत्र को जीरो जोन घोषित किया है. इन दिनों श्रद्धालु अपने निजी वाहनों से सीधे मंदिर तक नहीं पहुंच सकेंगे. केवल आवश्यक सेवाओं और विशेष अनुमति प्राप्त वाहनों को ही प्रवेश दिया जाएगा.
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हल्द्वानी, काठगोदाम, नैनीताल, भीमताल, भवाली और खैरना से शटल बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं. श्रद्धालुओं को अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़े करने होंगे और वहां से शटल बसों के माध्यम से मंदिर पहुंचना होगा. इस बार भीड़ प्रबंधन के लिए जंगल के रास्ते एक विशेष ट्रैकिंग रूट भी तैयार किया गया है.
बाबा नीम करौली महाराज देश के प्रसिद्ध संतों में गिने जाते हैं. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था और उनका वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था. बाद में वे नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए. बाबा अपनी सादगी, सेवा और भक्ति के लिए जाने जाते थे. उनके अनुयायी उन्हें भगवान हनुमान का परम भक्त मानते हैं.
आज कैंची धाम की पहचान केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है. यह दुनिया भर में प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है. यहां विदेशी श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. स्टीव जॉब्स और मार्क जुकेरबर्ग के कैंची धाम आने की चर्चाएं भी इसे वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण रही हैं.
कैंची धाम की स्थापना 15 जून 1964 को बाबा नीम करौली महाराज ने की थी. तभी से हर वर्ष इस दिन स्थापना दिवस बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, भंडारा और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाता है. श्रद्धालुओं के लिए यह दिन किसी पर्व से कम नहीं माना जाता.
स्थापना दिवस पर बाबा को मालपुए का विशेष भोग लगाया जाएगा. इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाएगा. विशाल भंडारे का आयोजन भी आकर्षण का केंद्र रहेगा. सुरक्षा व्यवस्था के तहत 1500 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के जवान तैनात किए गए हैं. प्रशासन ने श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने और सहयोग बनाए रखने की अपील की है.