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गुरु पूर्णिमा पर संत प्रेमानंद का अमृत संदेश, बोले- मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को भगवत प्रेम, ईष्ट चिंतन और पवित्र वाणी का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य भगवान का प्रेम और साक्षात्कार प्राप्त करना है.

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Edited By: Reepu Kumari
गुरु पूर्णिमा पर संत प्रेमानंद का अमृत संदेश, बोले- मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है
Courtesy: Pinterest

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर यमुना विहार कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज ने दीक्षित शिष्यों को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक जीवन का मूल उद्देश्य समझाया. उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन केवल भगवान का प्रेम और साक्षात्कार प्राप्त करने के लिए मिला है और इसी मार्ग से दुखों और विकारों से मुक्ति संभव है. अपने प्रवचन में संत प्रेमानंद ने ईष्ट चिंतन, प्रेम, सत्य और मधुर वाणी को साधना का आधार बताया. उन्होंने कहा कि केवल चर्चा करने से लाभ नहीं मिलता, बल्कि हृदय में सच्चा प्रेम और भगवान के प्रति समर्पण होना आवश्यक है. महोत्सव में कई राज्यों से बड़ी संख्या में शिष्य भी शामिल हुए.

भगवत प्रेम को बताया जीवन का उद्देश्य

संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य भगवत प्रेम और भगवान का साक्षात्कार है. उन्होंने बताया कि संसार के दुखों और विकारों से वास्तविक मुक्ति केवल मनुष्य जीवन में ही संभव है. उनके अनुसार, जब हृदय में ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम जागता है, तभी साधना का वास्तविक फल प्राप्त होता है.

ईष्ट चिंतन से बढ़ता है प्रेम

प्रवचन के दौरान उन्होंने नवनिकुंज के प्रेमरस का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हृदय में प्रीति नहीं है तो केवल मुख से चर्चा करने का लाभ नहीं मिलता. उन्होंने बताया कि निरंतर ईष्ट चिंतन से ही भगवान के प्रति प्रेम विकसित होता है और साधक का मन आध्यात्मिक मार्ग पर स्थिर रहता है.

वाणी को पवित्र रखने की सीख

संत प्रेमानंद ने कहा कि व्यक्ति को अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए. उन्होंने समझाया कि दूसरों की निंदा करने से कोई लाभ नहीं मिलता, बल्कि पुण्य का क्षय होता है और पाप बढ़ता है. उन्होंने सत्य, मधुर और हितकारी वचन बोलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि पवित्र वाणी से चित्त भी निर्मल होता है.

सबके प्रति प्रेम और निष्कपट व्यवहार

अपने संदेश में संत प्रेमानंद ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में भगवान का अंश विद्यमान है. इसलिए सभी से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना चाहिए. उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि वे किसी के साथ छल, कपट या स्वार्थ का व्यवहार न करें, बल्कि निष्कपट भाव से जीवन जीने का प्रयास करें.

पांच राज्यों से पहुंचे दीक्षित शिष्य

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर राजस्थान, हिमाचल, असम, महाराष्ट्र और तेलंगाना से दीक्षित शिष्य यमुना विहार कुंज आश्रम पहुंचे. वहीं, वृंदावन स्थित श्रीराधा केलिकुंज में भी हजारों श्रद्धालुओं ने संत प्रेमानंद की पादुकाओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया.