लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी आवास योजनाओं के तहत बने हजारों फ्लैट वर्षों से बिना खरीदार के पड़े हैं. गाजियाबाद जैसे अहम शहर में यह समस्या और गहरी हो गई थी. अब इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. नई मूल्य निर्धारण नीति के तहत इन फ्लैटों की कीमतों में भारी कटौती की गई है. सरकार को उम्मीद है कि इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के खरीदार आगे आएंगे और लंबे समय से अटकी इन्वेंट्री साफ हो सकेगी.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद में करीब 10,000 फ्लैट ऐसे हैं जिनकी बिक्री अब तक नहीं हो पाई. इनमें लगभग 1,748 फ्लैट गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के हैं. वहीं उत्तर प्रदेश आवास बोर्ड के पास करीब 8,000 यूनिट बिना बिके हैं. ये फ्लैट अलग अलग योजनाओं और श्रेणियों में फैले हुए हैं, जिनमें EWS से लेकर बड़े परिवारों के लिए बने घर शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश आवास बोर्ड की अधिकतर इन्वेंट्री तीन बड़ी योजनाओं में केंद्रित है. सिद्धार्थ विहार की गंगा यमुना और हिंडन परियोजनाओं में करीब 4,000 फ्लैट हैं. इसके अलावा मंडोला आवास योजना में भी लगभग 4,000 यूनिट अब तक नहीं बिक पाई हैं. इन योजनाओं को पहले अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कीमत और बाजार हालात के चलते बिक्री धीमी रही.
सरकार ने ‘मॉडल कॉस्टिंग दिशानिर्देश मूल सिद्धांत 2025’ लागू किए हैं. इसके तहत भूमि लागत, विकास शुल्क और निर्माण खर्च का नया आकलन किया गया है. अधिकारियों के अनुसार इस संशोधित मॉडल से प्रति फ्लैट कीमत में करीब 25 प्रतिशत तक की कमी आएगी. कैबिनेट की मंजूरी के बाद सभी विकास प्राधिकरणों को इस नीति को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.
नई नीति में सिर्फ कीमत घटाना ही नहीं, बल्कि जल्दी भुगतान को भी प्रोत्साहित किया गया है. 45 दिनों के भीतर पूरा भुगतान करने पर 6 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी. 60 दिनों में भुगतान करने वालों को 5 प्रतिशत और 90 दिनों में भुगतान करने वालों को 4 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे गंभीर खरीदारों की संख्या बढ़ेगी.
कॉर्नर फ्लैट, पार्किंग फेसिंग या चौड़ी सड़क पर बने घरों के लिए प्रीमियम शुल्क की सीमा अब 5 प्रतिशत तय की गई है. पहले यह सीमा 8 से 10 प्रतिशत तक थी. कुल प्रीमियम शुल्क मूल लागत के 12 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा. सरकार इसे एक रणनीतिक क्लियरेंस ड्राइव मान रही है. गाजियाबाद में इसकी सफलता के आधार पर पूरे प्रदेश में इसी तरह की नीति लागू की जा सकती है.