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'प्रेमिका से शादी करनी है', अस्पताल पहुंचकर बोला HIV पॉजिटिव युवक, हैरान रह गये डॉक्टर

युवक ने डॉक्टरों और स्टाफ के सामने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि वह अपनी प्रेमिका के साथ सम्मानजनक जीवन जीना चाहता है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'प्रेमिका से शादी करनी है', अस्पताल पहुंचकर बोला HIV पॉजिटिव युवक, हैरान रह गये डॉक्टर
Courtesy: pinterest

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक भावनात्मक और संवेदनशील मामला सामने आया है. जिला चिकित्सालय में एक HIV पॉजिटिव युवक अपनी प्रेमिका से शादी करने की इच्छा लेकर पहुंचा. युवक ने डॉक्टरों और स्टाफ के सामने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि वह अपनी प्रेमिका के साथ सम्मानजनक जीवन जीना चाहता है. उसकी बात सुनकर अस्पताल में मौजूद डॉक्टर और कर्मचारी असमंजस में पड़ गए, क्योंकि मामला भावनाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ था.

डॉक्टरों ने समझाया स्वास्थ्य का जोखिम

अस्पताल के एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर के विशेषज्ञों ने युवक को शांति से समझाने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि यदि HIV पॉजिटिव व्यक्ति किसी HIV निगेटिव पार्टनर से शादी करता है, तो संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है. हालांकि, डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि HIV कोई लाइलाज बीमारी नहीं है और दवाओं के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए बेहद सावधानी और समझदारी जरूरी होती है.

भावुक हुआ युवक, बताई अपनी मजबूरी

बातचीत के दौरान युवक भावुक हो गया. उसने बताया कि वह अपनी प्रेमिका से बहुत प्यार करता है और समाज में अकेलेपन का जीवन नहीं जीना चाहता. उसका कहना था कि वह भी एक सामान्य इंसान की तरह शादी कर परिवार बसाना चाहता है. युवक की बातों ने डॉक्टरों को भी भावनात्मक रूप से प्रभावित किया, लेकिन वे किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते थे.

एआरटी सेंटर की मानवीय पहल

युवक को निराश लौटाने के बजाय एआरटी सेंटर ने एक मानवीय कदम उठाया. सेंटर के स्टाफ ने युवक का बायोडाटा तैयार करवाया और उसे भरोसा दिलाया कि उसके लिए HIV पॉजिटिव महिला की तलाश की जाएगी, जो विवाह के लिए इच्छुक हो. डॉक्टरों का मानना है कि इससे युवक को जीवनसाथी मिलने की संभावना भी बनेगी और HIV संक्रमण के फैलाव को रोकने में भी मदद मिलेगी.

समाज और स्वास्थ्य के बीच संतुलन

यह मामला दिखाता है कि HIV केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक चुनौती भी है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में भावनाओं के साथ-साथ सही जानकारी और जिम्मेदार फैसले बेहद जरूरी हैं, ताकि व्यक्ति और समाज दोनों सुरक्षित रह सकें.