उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों और उस समय की कानून-व्यवस्था पर करारा हमला बोला. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था और उनके इशारों पर समानांतर सरकारें चलाई जाती थीं. उन्होंने कहा कि उस दौर में सरकारें माफिया के सामने घुटने टेकती थीं और पुलिस बेबस नजर आती थी. यदि राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ कमजोर हो, तो कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ नहीं किया जा सकता.
सड़क दुर्घटनाओं और यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस को 87 नए अत्याधुनिक इंटरसेप्टर वाहन समर्पित किए. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जहां कोविड काल के ढाई-तीन वर्षों में प्रदेश में लगभग 24 हजार मौतें हुईं, वहीं हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब 23 से 24 हजार लोग अपनी जान गंवा देते हैं. ये इंटरसेप्टर वाहन आधुनिक तकनीकों से लैस हैं और विभिन्न जनपदों में सड़क सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने तथा प्रवर्तन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जांबाज पुलिसकर्मियों की शहादत और अदम्य साहस को नमन किया. उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार एसटीएफ के दिवंगत इंस्पेक्टर स्वर्गीय सुनील कुमार सिंह को मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा 'कीर्ति चक्र' से सम्मानित किया गया. सुनील कुमार ने 22 जनवरी 2025 को अपराधियों के साथ हुई मुठभेड़ में चार दुर्दांत बदमाशों को ढेर कर वीरगति पाई थी. सीएम ने उनके परिवार को सम्मानित किया. इसके साथ ही समारोह में 16 पुलिसकर्मियों को 'राष्ट्रपति वीरता पदक' और 10 को 'मुख्यमंत्री वीरता पदक' प्रदान किए गए.
इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के पूर्व महानिदेशक (डीजीपी) प्रकाश सिंह द्वारा लिखित पुस्तक 'संघर्ष' का विमोचन भी किया. सीएम ने कहा कि प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की लंबे समय तक वकालत की, उत्तर प्रदेश उसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है. वर्तमान में राज्य के सात बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली सफलतापूर्वक कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से पुलिस बल के अनुभव, उनकी जमीनी चुनौतियां और वैचारिकी की यात्रा देश के सामने आई है.
सुरक्षा के वातावरण पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बंद कमरे में बैठकर किसी पर टिप्पणी करना बहुत आसान काम है. कोई भी व्यक्ति कितना ही बड़ा क्यों न हो, यदि उसकी सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनते देर नहीं लगती. उन्होंने कहा कि सुरक्षित वातावरण में ही समाज की समृद्धि संभव है और यूपी पुलिस का ध्येय वाक्य 'आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प' इसी विचार को दर्शाता है.
सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि आधुनिक पुलिसिंग का मुख्य आधार तकनीक है. उत्तर प्रदेश में 'सेफ सिटी' परियोजना के तहत 14 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो न केवल अपराध की रोकथाम कर रहे हैं बल्कि आपराधिक घटनाओं के त्वरित अनावरण में भी मदद कर रहे हैं. राज्य के जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किए गए हैं, जिससे विचार, वीरता और तकनीक का बेहतर समन्वय देखने को मिल रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की छवि ऐसी थी कि बाहरी राज्यों में 'यूपी वाला' कहकर लोगों को हतोत्साहित किया जाता था. पहले पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता केवल छह हजार कार्मिक प्रतिवर्ष थी और पुलिसकर्मी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर थे. राज्य के विभिन्न हिस्सों में लंबे समय तक दंगे और कर्फ्यू का माहौल रहता था, जिससे प्रदेश को 'बीमारू' कहा जाने लगा. 2017 के बाद पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशिक्षण क्षमता और कार्यशैली में आमूलचूल परिवर्तन किए गए, जिससे आज प्रदेश विकास के नए आयाम छू रहा है.
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह, डीजीपी राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, स्वामी धर्मबंधु और प्रभात प्रकाशन के पवन अग्रवाल सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्मिकों के परिवारजन उपस्थित रहे.