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मौनी अमावस्या पर संगम में हंगामा, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोकने पर हुआ बवाल

मौनी अमावस्या पर प्रयागराज संगम में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोके जाने से हंगामा हुआ. प्रशासन ने भीड़ को डायवर्ट कर स्थिति पर नियंत्रण किया.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
मौनी अमावस्या पर संगम में हंगामा, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोकने पर हुआ बवाल
Courtesy: @ians_india x account

प्रयागराज: मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेला 2026 के दौरान बड़ा हंगामा देखने को मिला. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रथ पुलिस ने संगम से पहले ही रोक दिया. प्रशासन की ओर से जुलूस के साथ संगम तट तक जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. इसी बात को लेकर शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी बहस शुरू हो गई.

प्रशासन ने 17 और 18 जनवरी की रात 12 बजे से मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया था. मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि शंकराचार्य के रथ के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी. इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रथ को आगे बढ़ने से रोक दिया गया. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने संतों के साथ अभद्रता की और मारपीट भी की.

प्रशासन ने शंकराचार्य के समर्थकों पर क्या लगाया आरोप?

रथ रोके जाने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई. समर्थकों की भीड़ बढ़ने लगी और संगम क्षेत्र में अव्यवस्था की आशंका पैदा हो गई. इसी दौरान पुल नंबर चार का बैरियर टूटने की सूचना सामने आई. प्रशासन का दावा है कि बैरियर शंकराचार्य के समर्थकों द्वारा तोड़ा गया. वहीं शंकराचार्य ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सब प्रशासन की नाकामी छिपाने की कोशिश है.

पुलिस ने क्या लिया एक्शन?

हंगामे को देखते हुए पुलिस ने तुरंत भीड़ को डायवर्ट किया. आरएएफ के जवानों ने कतार लगवाकर श्रद्धालुओं को दूसरे मार्गों से भेजा. पुलिस और समर्थकों के बीच बहस की खबर मिलते ही पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, मेलाधिकारी ऋषिराज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है और केवल पांच लोगों के साथ पैदल स्नान की अनुमति दी जा सकती है.

कैसी थी वहां की स्थिति?

मौनी अमावस्या के दिन तड़के चार बजे से ही संगम पर स्नान शुरू हो गया था. सुबह नौ बजे तक करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके थे. प्रशासन के अनुमान के मुताबिक इस बार तीन से चार करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. भारी भीड़ को देखते हुए शनिवार दोपहर से ही कई स्थानों पर वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया था. दिनभर संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क रही.