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माघ मेला 2026 में पहली बार हुआ 11 संतों का पट्टाभिषेक, देश की पहली किन्नर वकील बनीं महामंडलेश्वर

माघ मेला 2026 में सनातनी किन्नर अखाड़े ने 11 संतों का पट्टाभिषेक किया. देश की पहली किन्नर अधिवक्ता को महामंडलेश्वर बनाकर ऐतिहासिक पहल की गई.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
माघ मेला 2026 में पहली बार हुआ 11 संतों का पट्टाभिषेक, देश की पहली किन्नर वकील बनीं महामंडलेश्वर
Courtesy: Pinterest

प्रयागराज: प्रयागराज में माघ मेला 2026 के दौरान सनातनी किन्नर अखाड़े ने एक नया इतिहास रचा है. माघ मेला क्षेत्र में पहली बार हुए भव्य पट्टाभिषेक कार्यक्रम में 11 संतों को अहम पद दिए गए हैं. इनमें 10 संतों को महामंडलेश्वर और एक संत को महंत बनाया गया है.

खास बात यह रही कि देश की पहली किन्नर अधिवक्ता को भी महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. सनातनी किन्नर अखाड़े का यह आयोजन परंपरागत 13 अखाड़ों की विधि और नियमों के अनुसार संपन्न हुआ है. पट्टाभिषेक से पहले सभी संतों ने संगम में पिंड दान किया और विधि विधान से गंगा स्नान किया.

कितने गुरुओं कराई दीक्षा की प्रक्रिया?

इसके बाद पांच गुरुओं द्वारा दीक्षा की प्रक्रिया पूरी कराई गई. एक गुरु ने लंगोटी, दूसरे ने कंठी, तीसरे ने चोटी काटी और चौथे ने भस्म प्रदान की.इसके बाद आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि टीना मां ने गुरुमंत्र देकर संतों को पद प्रदान किया.

कौन-कौन से संतों को बनाया गया महामंडलेश्वर?

महामंडलेश्वर बनाए गए संतों में दिल्ली की पूनम मां, देहरादून के नीतेश शंकर नंद गिरि, कोलकाता की अभिरूपा रंजीता, दिल्ली के पवित्रानंद गिरि, हरिद्वार किन्नर धाम की तारा, पंजाब की सोनम नंद गिरि, महाराष्ट्र की उमा पुजारी, ज्योति स्वामी, श्रीगायत्री और प्रयागराज की संजना कौशल्यानंद गिरि शामिल हैं. प्रयागराज की रानी कौशल्यानंद गिरि को महंत पद की जिम्मेदारी दी गई है.

कौन हैं देश की पहली महिला किन्नर अधिवक्ता? 

अभिरूपा रंजीता जो कोलकाता की हैं, देश की पहली महिला किन्नर अधिवक्ता हैं. इस पट्टाभिषेक में पुरुष, महिला और किन्नर सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है. अखाड़े के आचार्य ने बताया कि समाज के हर वर्ग को सनातन परंपरा से जोड़ना ही इस पहल का उद्देश्य है.

इसी क्रम में किन्नर अखाड़े में सात महामंडलेश्वर, छह श्रीमहंत, 11 महंत और 21 कंठी चेला भी बनाए गए. आचार्य महामंडलेश्वर डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने सभी को गुरु मंत्र देकर दीक्षा दी. उन्होंने संतों से कहा कि रील मत बनाओ और सनातन धर्म को आगे बढ़ाओ. साथ ही आने वाले कुम्भ मेलों की तैयारियों में जुटने का संदेश भी दिया गया.