भदोही: उत्तर प्रदेश की सियासत में जिलों और शहरों के नाम बदलने का सिलसिला नया नहीं है, लेकिन भदोही की कहानी कुछ ज्यादा ही दिलचस्प है. कालीन नगरी के नाम से दुनिया भर में पहचान रखने वाला यह जिला करीब 32 साल में पांच बार अपनी प्रशासनिक पहचान बदल चुका है. अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया है कि भदोही को फिर से 'संत रविदास नगर भदोही' के नाम से जाना जाएगा.
भदोही को पहली बार 1994 में अलग जिला बनाया गया था. उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे. नया जिला बनने के बाद कुछ वर्षों तक इसकी पहचान भदोही के नाम से रही. इसके बाद प्रदेश की सत्ता बदली और 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर कर दिया.
इसके करीब दो साल बाद 1999 में भाजपा की सरकार बनी. तत्कालीन मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्ता ने दोनों नामों को जोड़ते हुए जिले का नाम 'संत रविदास नगर-भदोही' कर दिया. इस तरह भदोही के नाम के साथ संत रविदास नगर भी जुड़ गया. इसके बाद एक बार फिर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और नाम बदलने की राजनीति जारी रही.
2014 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिले के नाम से संत रविदास नगर हटा दिया. इसके बाद इसे फिर से भदोही के नाम से जाना जाने लगा. करीब एक दशक से अधिक समय तक जिले की प्रशासनिक पहचान भदोही ही रही. अब 2026 में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने फिर नाम में बदलाव का ऐलान किया है और इसे ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से पहचान देने की बात कही गई है.
भदोही की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है. यह जिला दुनिया भर में अपने हस्तनिर्मित कालीनों के लिए प्रसिद्ध है. यहां का कालीन उद्योग लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार रहा है. भदोही में तैयार होने वाले कालीन देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं. बड़ी संख्या में कारीगर और ग्रामीण परिवार इस उद्योग से जुड़े हुए हैं.
अब जिले के नाम में संत रविदास का नाम प्रमुखता से जोड़ा गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाम की घोषणा करते हुए संत रविदास की सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश की विरासत का भी उल्लेख किया.
भदोही जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं, जिनमें भदोही, ज्ञानपुर और औराई शामिल हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में तीनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिले थे. भदोही सीट से समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग विजयी हुए थे. ज्ञानपुर से भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के विपुल दुबे ने जीत दर्ज की थी, जबकि औराई सुरक्षित सीट से भाजपा के दीनानाथ भास्कर विजयी हुए थे.
जिले की राजनीति में ब्राह्मण, बिंद, यादव, दलित, मुस्लिम, क्षत्रिय, पाल और मौर्य जैसे सामाजिक समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है. अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में इन समूहों का चुनावी प्रभाव राजनीतिक दलों के समीकरणों को प्रभावित करता रहा है.