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'साहब ये मेरी मां का कटा हाथ है' ITBP जवान ने तीन दिन तक कटे हाथ के साथ लगाए चक्कर, बोला- इंसाफ चाहिए

कानपुर में ITBP जवान अपनी मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचा. जवान ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
'साहब ये मेरी मां का कटा हाथ है' ITBP जवान ने तीन दिन तक कटे हाथ के साथ लगाए चक्कर, बोला- इंसाफ चाहिए
Courtesy: X

कानपुर में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. ITBP जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर 3 दिनों से घूम रहे हैं. न्याय की गुहार लगाने वह पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए. वहां उन्होंने रोते हुए कहा कि वह तीन दिनों से न्याय के लिए पुलिस चौकियों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई. जवान का आरोप है कि एक निजी अस्पताल की लापरवाही की वजह से उनकी मां का हाथ काटना पड़ा.

गलत इंजेक्शन लगाने से फैला संक्रमण

फतेहपुर निवासी विकास सिंह इस समय कानपुर के महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात हैं. उन्होंने बताया कि उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस लेने में दिक्कत और कमजोरी की शिकायत थी. शुरुआत में उनका इलाज ITBP अस्पताल में हुआ. तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया. रास्ते में जाम लगने के कारण विकास अपनी मां को टाटमिल स्थित एक अस्पताल में ले गए. वहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया और हाथ में कैनुला लगाया. परिवार का आरोप है कि इसके बाद गलत इंजेक्शन लगाने से हाथ में संक्रमण फैल गया.

संक्रमण बढ़ा तो काटना पड़ा हाथ

विकास के मुताबिक, इलाज के कुछ घंटों बाद उनकी मां का हाथ काला पड़ने लगा. सूजन तेजी से बढ़ती चली गई. हालत गंभीर होने पर उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने काफी कोशिश की लेकिन संक्रमण इतना बढ़ चुका था कि हाथ काटना पड़ा. जवान ने कहा कि मां का हाथ कटते देख वह पूरी तरह टूट गए.

कमिश्नर के सामने छलका दर्द

सोमवार को विकास सिंह अपनी मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के कार्यालय पहुंचे. उन्होंने अधिकारियों को पूरी घटना बताई और कार्रवाई की मांग की. कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत सीएमओ से बात की और जांच के आदेश दिए. कटे हुए हाथ को सुरक्षित रखने के लिए थर्माकोल बॉक्स में रखवाया गया. विकास ने कहा कि वह सिर्फ इंसाफ चाहते हैं ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े.