झांसी-कानपुर हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद के आखिरी शब्द प्रत्यक्षदर्शियों के दिलों में बस गए. मौके पर सबसे पहले पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल अबान बार-बार "मुझे बचा लो" कहकर मदद की गुहार लगा रहा था. हालांकि कार इतनी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी कि उसे बाहर निकालने में काफी समय लग गया. बाद में अबान और उसके दोस्त सोनू ने दम तोड़ दिया.
प्रत्यक्षदर्शी पप्पू यादव और दीपक यादव के अनुसार वे हाईवे से गुजर रहे थे, तभी अचानक एक बछड़ा सड़क पर आ गया. उसी समय एक मोटरसाइकिल भी सामने आ गई. कानपुर की ओर से तेज रफ्तार में आ रही क्रेटा कार ने पहले बछड़े और फिर बाइक को बचाने की कोशिश की, लेकिन चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका. इसके बाद कार डिवाइडर से टकरा गई और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. हालांकि हादसे के कारणों की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
Abaan Ahmed, the youngest son of slain gangster-politician Atiq Ahmed, died after the speeding car he was travelling in crashed into a divider in Uttar Pradesh's Jhansi-Kanpur Highway.
— Rishi Bagree (@rishibagree) August 6, 2026
The driver lost control of the SUV while trying to avoid an animal that suddenly came onto the… pic.twitter.com/oKsCgS9suE
ग्रामीणों ने बताया कि दुर्घटना के बाद कार के दरवाजे जाम हो गए थे. घायलों को निकालने के लिए गांव से टायर लीवर और लोहे की रॉड मंगाई गई. कांच तोड़कर किसी तरह अबान और अन्य लोगों को बाहर निकाला गया. सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और कार में फंसे बाकी तीन घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा. पुलिस के अनुसार तीनों घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है.
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि दुर्घटना के समय कार की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कार में सवार किसी व्यक्ति ने सीट बेल्ट नहीं लगाई थी. कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि हादसे के दौरान एयरबैग समय पर नहीं खुले. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस व वाहन विशेषज्ञ तकनीकी जांच कर रहे हैं.
पुलिस की तलाशी के दौरान कार से सिगरेट के पैकेट और दो नई किताबें मिलीं. स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि ये किताबें झांसी जेल में बंद अबान के भाई अली अहमद के लिए लाई गई थीं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. वहीं परिजनों ने अली अहमद और लखनऊ जेल में बंद एक अन्य भाई को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति देने की मांग की है. घटना के बाद झांसी-कानपुर हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग से यातायात संचालित कर कुछ समय बाद सामान्य कराया.