पंजाब में नशे की समस्या ने कई परिवारों को तोड़कर रख दिया था, लेकिन अब भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम धीरे-धीरे उम्मीद की किरण बन रही है. शुरू हुए इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और हजारों युवा फिर से सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं. यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने वाला अभियान है. जहां एक तरफ तस्करों पर सख्ती हो रही है, वहीं दूसरी तरफ इलाज, पुनर्वास और जागरूकता पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि मार्च 2025 से मई 2026 तक राज्य के नशामुक्ति और ओओएटी केंद्रों में 90,000 से अधिक युवाओं का सफल उपचार किया गया. सरकार का फोकस केवल सजा देने पर नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों को परिवार और समाज में वापस लाने पर भी है.
अभियान के तहत नशा तस्करों की संपत्तियां जब्त की जा रही हैं, पाकिस्तान बॉर्डर पर एंटी-ड्रोन तकनीक और मजबूत निगरानी लगाई गई है. साथ ही पूरे पंजाब में ड्रग सेंसस चल रहा है ताकि समस्या की सही तस्वीर मिल सके और लक्षित कार्रवाई हो.
स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यशालाएं चल रही हैं और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेलों पर खास बजट दिया गया है. शुरुआती संकेत जैसे चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन न लगना, नींद की समस्या या पैसों की बार-बार मांग पर माता-पिता को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.
सरकार मानती है कि नशे के खिलाफ स्थायी जीत तभी होगी जब परिवार, स्कूल और समाज मिलकर काम करेंगे. अभिभावकों को सलाह है कि बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं, खुलकर बात करें, उनके दोस्तों पर नजर रखें और शुरुआती संकेत पर तुरंत मदद लें.