चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गई है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच बढ़ता तनाव पार्टी के कार्यक्रमों में साफ दिखाई देने लगा है. समाना और संगरूर में हुए घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि संगठन के भीतर मतभेद अब कार्यकर्ताओं के व्यवहार पर भी असर डाल रहे हैं. इस घटनाक्रम ने चुनावी तैयारियों के बीच नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है.
पटियाला के समाना में आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान माहौल अचानक बदल गया. जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने संबोधन शुरू किया, कुछ कार्यकर्ताओं ने चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए. 'चन्नी लियाओ, पंजाब बचाओ' और 'चन्नी लियाओ, कांग्रेस बचाओ' जैसे नारों से कार्यक्रम में व्यवधान पैदा हुआ. इससे मंच पर मौजूद नेताओं के सामने असहज स्थिति बन गई.
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संगरूर और समाना में कांग्रेस के कार्यक्रमों में जमकर हंगामा।@CHARANJITCHANNI और @RajaBrar_INC के कार्यकर्ता आपस में भिड़े।
संगरूर में भूपेश बघेल के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगे।
कार्यकर्ताओं के बीच कुर्सियां चलीं और चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में नारेबाजी हुई।… pic.twitter.com/QCpkcGPNiy— Amit Pandey (@amitpandaynews) August 1, 2026Also Read
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कार्यक्रम के दौरान लगातार हो रही नारेबाजी पर राजा वड़िंग ने नाराजगी जताई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रम को बाधित करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. उनका कहना था कि संगठन की मजबूती सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की साझा जिम्मेदारी है. इस बयान के बाद भी राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज बना रहा.
संगरूर के कैलिफोर्निया रिजॉर्ट में आयोजित बैठक में भी माहौल तनावपूर्ण रहा. यहां कुछ कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस के बाद धक्का-मुक्की और कुर्सियां फेंकने जैसी घटनाएं सामने आईं. कार्यक्रम के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में नारे लगे, जबकि भूपेश बघेल के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया गया. मौके पर कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.
इसी बीच कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक मदनलाल जलालपुर के घर चरणजीत सिंह चन्नी का पहुंचना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया. उनके साथ पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु भी मौजूद थे. दूसरी ओर, चन्नी ने पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल के बूथ सशक्तिकरण अभियान से दूरी बनाए रखी, जिससे दोनों खेमों के बीच मतभेद और स्पष्ट नजर आए.
पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल लगातार वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर संगठन को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि विचारों में मतभेद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और कांग्रेस चुनाव पूरी एकजुटता के साथ लड़ेगी. हालांकि हालिया घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है.