पंजाब कांग्रेस ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और बर्खास्तगी की मांग को लेकर चंडीगढ़ में विशाल प्रदर्शन किया. सेक्टर-17 स्थित भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कार्यालय से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बीच रास्ते में ही भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया.
प्रदर्शनकारियों ने जब बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी धक्का-मुक्की हुई. स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का प्रयोग करना पड़ा. इसके बावजूद कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करते रहे.
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की अगुआई में यह विरोध मार्च निकाला जा रहा था. जब पुलिस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने लगी, तो वड़िंग पुलिस की कार्रवाई से बचने और विरोध जताने के लिए एक बस की छत पर चढ़ गए. वहां से उन्होंने 'वोट काटने वाले ज्ञानेश कुमार गिरफ्तार हों' के नारे लगाए. इस प्रदर्शन में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता भी हाथों में होर्डिंग लेकर पहुंचीं.
मार्च से पहले राजा वड़िंग ने मांग की कि आगामी विधानसभा चुनावों तक मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत रोका जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि नए फॉर्म-6 की जटिलताओं के कारण कई नए मतदाता पंजीकृत नहीं हो पा रहे हैं और लाखों योग्य वोटरों के नाम हटने की आशंका है. वड़िंग ने कहा कि चुनाव 2024 की लोकसभा चुनाव वाली मतदाता सूची के आधार पर ही कराए जाने चाहिए.
यह पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद भड़का, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR, फॉर्म-6 और डेटाबेस से जुड़े मुद्दों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और आयोग के सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे.