चंडीगढ़: पंजाब भाजपा मिशन के तहत भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियां पूरी गति से शुरू कर दी हैं. अमित शाह पंजाब रणनीति की कमान सीधे अपने हाथों में लेकर पार्टी को राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले उतारने की योजना पर काम कर रहे हैं. इस बार शिरोमणि अकाली दल के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन नहीं होगा और भाजपा अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ मैदान में उतरेगी.
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसी महीने पंजाब भाजपा नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने वाले हैं. इस बैठक में राज्य में चलाए जाने वाले नशा विरोधी जन संपर्क अभियान को अंतिम रूप दिया जाएगा. पार्टी का मानना है कि नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति और समाज दोनों में अत्यंत संवेदनशील है और इस पर मजबूत जनसंपर्क से व्यापक जनसमर्थन जुटाया जा सकता है.
भाजपा की इस महत्वाकांक्षी योजना के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. उन चुनावों में पार्टी को पंजाब में 18.56 प्रतिशत मत मिले थे. चुनावी विश्लेषण में सामने आया कि 23 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा पहले स्थान पर रही थी. भाजपा का आकलन है कि बहुमत के लिए आवश्यक 59 सीटों से वह केवल 21 सीटें दूर है. चार कोणीय मुकाबले में जीत-हार का अंतर कम होता है, जिससे पार्टी को अपना जनाधार बढ़ाने का अवसर दिखता है.
पंजाब भाजपा अभियान में केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की भूमिका अहम मानी जा रही है. उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने के पक्ष में नहीं है. सूत्रों के अनुसार वे केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देकर पंजाब की राजनीति में उतर सकते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं.
प्रदेश अध्यक्ष पद पर ढिल्लो की नियुक्ति के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की नाराजगी की खबरें आई थीं, हालांकि उन्होंने बाद में इसे खारिज कर दिया. वहीं पार्टी के महासचिव डॉ. जगमोहन राजू ने इस्तीफा दिया है और पार्टी नेतृत्व उनसे बातचीत जारी रखे हुए है. भाजपा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आंतरिक मतभेद चुनावी तैयारियों पर असर न डालें.