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MP में अब एक शादी वालों को ही मिलेगा रहने का अधिकार? UCC पर CM मोहन यादव के बयान से मचा सियासी बवाल

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समान नागरिक संहिता पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि एक शादी की व्यवस्था ही कानून के अनुरूप होनी चाहिए. उनके बयान पर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
MP में अब एक शादी वालों को ही मिलेगा रहने का अधिकार? UCC पर CM मोहन यादव के बयान से मचा सियासी बवाल
Courtesy: Pinterest

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए और विवाह से जुड़े नियम भी सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए. उनके बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.

यूसीसी पर मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश में जब एक संविधान और समान व्यवस्था की बात की जाती है, तो अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून होने पर भी विचार होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक विवाह की व्यवस्था को कानून के अनुरूप माना जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना है. उन्होंने पहले दिए गए अपने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने सभी के लिए समान वैवाहिक नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया था.

तीन तलाक और समान अधिकारों का भी किया जिक्र

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने तीन तलाक से जुड़े कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इस व्यवस्था में पहले ही कानूनी बदलाव हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और हर नागरिक को समान अवसर तथा न्याय मिलना चाहिए. मुख्यमंत्री के अनुसार, समान नागरिक संहिता का उद्देश्य समाज में समानता और पारदर्शिता को मजबूत करना है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव किए बिना सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना समय की आवश्यकता है.

बयान पर सामने आईं अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

मुख्यमंत्री के बयान पर कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. उत्तर प्रदेश के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफ्राहीम हुसैन ने इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि इस्लाम भी न्याय और बराबरी की शिक्षा देता है. उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के साथ न्याय नहीं कर सकता, तो उसे दूसरी शादी का अधिकार नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी महिला के साथ भेदभाव या अन्याय इस्लाम की मूल भावना के विरुद्ध है. फिलहाल यूसीसी को लेकर देशभर में बहस जारी है और इस विषय पर अलग-अलग पक्ष अपनी राय रख रहे हैं.