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1000 साल पुराना रहस्यमयी शिव मंदिर, जिसके खंभों को आज तक नहीं गिन पाया कोई; जानें भूतों से क्या है कनेक्शन

मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में मौजूद करीब 1000 साल पुराना ककनमठ मंदिर है. जो अपनी अद्भुत वास्तुकला, बिना मसाले के जुड़े विशाल पत्थरों और न गिने जा सकने वाले खंभों के लिए जाना जाता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
1000 साल पुराना रहस्यमयी शिव मंदिर, जिसके खंभों को आज तक नहीं गिन पाया कोई; जानें भूतों से क्या है कनेक्शन
Courtesy: Pinterest

मुरैना: मध्य प्रदेश जिसे भारत का दिल कहा जाता है, वहां कई स्मारक, महल और किले हैं जो अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं. इनके अलावा भी यहां देखने के लिए बहुत कुछ है. ऐसा ही एक मंदिर जिसे भूतों का मंदिर भी कहा जाता है. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया में स्थित है. यह मंदिर काकनमठ के नाम से मशहूर है और अपनी रहस्यमयी कहानियों और अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है.

ककनमठ मंदिर की वास्तुकला को 10वीं सदी का माना जाता है. इसलिए, यह माना जा सकता है कि यह लगभग एक हजार साल पुराना है. यह गुर्जर-प्रतिहार शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है. यह मंदिर बड़े-बड़े पत्थरों से बना है और इसका शिखर हवा में तैरता हुआ लगता है. 

कैसी है अभी मंदिर की स्थिति?

आज यह मंदिर जर्जर हालत में है लेकिन यहां की मूर्तियां आज भी मनमोहक हैं. दीवारों और छतों पर देवी-देवताओं और पौराणिक जीवों की नक्काशी की गई है. मंदिर में एक गर्भगृह, एक खंभों वाला मंडप और एक आकर्षक मुखमंडप (प्रवेश द्वार) है, जिसमें चूना, मिट्टी या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

इस मंदिर को किसने बनवाया था?

इतिहासकारों का मानना ​​है कि यह मंदिर 11वीं सदी में कच्छपघाट वंश की रानी काकनवती के आदेश पर बनवाया गया था और उन्हीं के नाम पर इसका नाम काकनमठ पड़ा. स्थानीय लोगों और आस-पास के इलाकों में एक कहानी यह भी प्रचलित है कि इसे भूतों ने एक ही रात में बनाया था. 

एक और कहानी के अनुसार, भूत मंदिर बना रहे थे तभी एक महिला ने अनाज पीसना शुरू कर दिया, जिससे भूत डरकर भाग गए और अधूरा काम छोड़कर चले गए. तब से यह मंदिर अधूरा ही रह गया. पुरातत्व विभाग के अधिकारी इन कहानियों को कल्पना और लोककथा मानते हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. 

स्थानीय लोगों का क्या है मानना?

स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि सूरज डूबने के बाद मंदिर पर भूतों का कब्जा हो जाता है और अजीब आवाजे सुनाई देती हैं. एक और कहानी यह है कि जिस दिन नाई समुदाय के नौ एक आंख वाले दूल्हे अपनी बारात के साथ यहां से गुजरेंगे, उस दिन मंदिर गिर जाएगा. ये कहानियां स्थानीय मान्यताओं और अंधविश्वासों पर आधारित हैं. 

इस मंदिर से जुड़ी एक अजीब कहानी यह भी है कि जो कोई भी सूरज डूबने के बाद यहां रुकता है, उसे डरावने दृश्य दिखाई देते हैं, जिससे उसकी रूह कांप जाती है. इसी डर के कारण लोग रात में यहां नहीं रुकते.

मंदिर के खंभों को गिनने का क्या है रहस्य?

मंदिर का ढांचा बिना किसी मसाले के पत्थरों को जोड़कर बनाया गया है और इसके खंभों को गिनना भी एक रहस्य है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में कोई भी खंभों को सही-सही गिन नहीं पाया है. हर बार जब कोई उन्हें गिनने की कोशिश करता है, तो संख्या या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती है. मंदिर में कई शिवलिंग और मूर्तियां भी हैं, जो खराब हालत में हैं.