उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और अवैध हथियारों के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस द्वारा विशेष अभियान 'ऑपरेशन आयुध' चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत एटा जिले के अलीगंज थाना क्षेत्र में एक अवैध शस्त्र निर्माण फैक्टरी का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक आरोपी को मौके से गिरफ्तार किया गया है.
पुलिस का मानना है कि यह कार्रवाई अवैध हथियारों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर बड़ी चोट साबित होगी. मामले में गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर अब उसके अन्य सहयोगियों की तलाश तेज कर दी गई है.
पुलिस टीम ने शनिवार रात को अलीगंज थाना क्षेत्र के गांव गेवर असदुल्लापुर निवासी सुधीर कुमार के ठिकाने पर छापेमारी की. तलाशी के दौरान वहां से दो तैयार तमंचे, एक अधबना तमंचा, एक जिंदा कारतूस और एक खोखा कारतूस (.315 बोर) बरामद किया गया. इसके अलावा पुलिस को नौ तमंचों की नाल, नौ पैंदी वाले हिस्से, ट्रिगर, हथियार बनाने के औजार और अन्य बड़ी मात्रा में उपकरण भी मिले. बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि आरोपी लंबे समय से अवैध हथियारों के निर्माण का कार्य कर रहा था.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हाल के दिनों में अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किए गए कई आरोपियों से पूछताछ के दौरान तमंचा निर्माण से जुड़े नेटवर्क की जानकारी मिली थी. इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने पिछले दस वर्षों में अवैध शस्त्र फैक्टरी चलाने के मामलों में जेल जा चुके और चिन्हित व्यक्तियों की सूची तैयार की. चार और पांच जुलाई की रात विशेष अभियान चलाकर ऐसे संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई. इसी अभियान के दौरान सुधीर कुमार के ठिकाने से अवैध हथियार बनाने की फैक्टरी का खुलासा हुआ.
आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वर्ष 2019 में भी वह अवैध शस्त्र फैक्टरी संचालित करने के आरोप में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है. जेल से रिहा होने के बाद बीमारी के कारण उसने कुछ समय तक यह काम बंद रखा, लेकिन करीब तीन से चार महीने पहले बदायूं निवासी दीपक उर्फ प्रदीप के संपर्क में आने के बाद उसने दोबारा तमंचे बनाना शुरू कर दिया. आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह अब तक चार से पांच तमंचे तैयार कर दीपक को दे चुका है. हथियार बनाने के लिए आवश्यक लोहा और अन्य सामग्री एटा की लोहा मंडी तथा फर्रुखाबाद से खरीदी जाती थी.
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी केवल नए तमंचे ही नहीं बनाता था, बल्कि पुराने और खराब हथियारों की मरम्मत भी करता था. इसके बाद तैयार हथियारों को एटा और आसपास के जिलों में अवैध रूप से बेचकर मोटी कमाई करता था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा हथियारों की सप्लाई किन क्षेत्रों तक की जाती थी.