शिवपुरी: मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है. शिवपुरी जिले के नरवर किले से करीब 3000 किलोग्राम वजन की 16वीं शताब्दी की ऐतिहासिक तोप चोरी होने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है. जांच एजेंसियां इस मामले में स्थानीय गिरोह के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच कर रही हैं.
पुलिस के अनुसार इतनी भारी तोप को बिना क्रेन और बड़े वाहन की मदद के ले जाना संभव नहीं है. प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि चोरी पूरी योजना के साथ की गई. करैरा के एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने बताया कि नरवर किला दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां न सीसीटीवी कैमरे हैं और न ही नियमित निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था है. पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और पुराने मामलों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है.
यह पहली बार नहीं है जब नरवर किला चोरों के निशाने पर आया हो. वर्ष 2007 में भी यहां से दो ऐतिहासिक तोपें चोरी हुई थीं. इनमें से एक तो कुछ समय बाद बरामद हो गई थी, लेकिन दूसरी आज तक नहीं मिल सकी. वर्ष 2012 में मुंबई पुलिस ने शिवपुरी के पूर्व शाही परिवार के एक सदस्य को अष्टधातु की एक तोप के साथ पकड़ा था, जिसे कथित तौर पर एक करोड़ रुपये में बेचने की कोशिश की जा रही थी. हालांकि जांच में स्पष्ट हुआ कि वह नरवर किले से चोरी हुई तोप नहीं थी.
मध्य प्रदेश से ऐतिहासिक धरोहरों की तस्करी के मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं. वर्ष 2006 में कटनी जिले से करीब 2200 वर्ष पुरानी भरहुत यक्षी की प्रतिमा चोरी हो गई थी. बाद में वर्ष 2016 में यह प्रतिमा अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मैनहट्टन स्थित एक गोदाम से बरामद हुई. अमेरिकी एजेंसियों ने प्राचीन वस्तुओं की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान इस प्रतिमा को जब्त किया था.
जांच में सामने आया कि भरहुत यक्षी की प्रतिमा को अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये में बेचने की तैयारी थी. इसी अभियान में मध्य प्रदेश से चोरी हुई सालभंजिका प्रतिमा और भगवान विष्णु की एक प्राचीन मूर्ति का हिस्सा भी बरामद किया गया. भारतीय पुरातत्व विशेषज्ञों ने अभिलेखों और एफआईआर के आधार पर इन धरोहरों की पहचान की थी.
पुलिस का कहना है कि चोरी की गई प्राचीन कलाकृतियां पहले कई बिचौलियों के माध्यम से बेची जाती हैं. बाद में नकली दस्तावेज तैयार कर उन्हें विदेशों की गैलरी, गोदामों या निजी संग्रहालयों तक पहुंचाया जाता है. इसी कारण जांच में अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की संभावना को भी गंभीरता से देखा जा रहा है.
नरवर किले से एक और ऐतिहासिक तोप के गायब होने के बाद राज्य में ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं. पुलिस ने पुराने मामलों की फाइलें भी दोबारा खोल दी हैं और उम्मीद जताई है कि जांच के दौरान महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं.