भोपाल: केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI जो पूर्व अभिनेत्री-मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत की जांच कर रहा है, उन्होंने 'टनल व्यू' नामक जांच तकनीक का इस्तेमाल किया है, ताकि 12 मई को भोपाल में उनके ससुराल में मृत पाए जाने से पहले के उनके आखिरी पलों को डिजिटल रूप से फिर से बनाया जा सके.
एजेंसी ट्विशा की मौत से पहले की घटनाओं का एक बहुत ही विस्तृत, मिनट-दर-मिनट वर्चुअल पुनर्निर्माण कर रही है ताकि घटना वाली रात की सटीक परिस्थितियों और घटनाओं के क्रम को समझा जा सके.
'टनल व्यू' तकनीक एक ऐसा तरीका है जिसके जरिए जांचकर्ता CCTV, फोन रिकॉर्ड, Wi-Fi लॉग, इंटरनेट गतिविधि, स्मार्ट-डिवाइस डेटा, फॉरेंसिक मैपिंग और गवाहों के बयानों को एक ही केंद्रित टाइमलाइन में सिंक्रनाइज करते हैं, जो किसी घटना के आखिरी पलों को डिजिटल रूप से फिर से बनाता है.
सूत्रों के अनुसार CBI कटारा हिल्स स्थित घर का एक वर्चुअल स्थानिक मॉडल बनाने के लिए CCTV फुटेज, मोबाइल फोन डेटा, Wi-Fi लॉग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR और कमरों के नक़्शों को एक साथ जोड़ रही है.
इसका उद्देश्य ट्विशा की गतिविधियों का पता लगाना, यह तय करना है कि घर के किन खास हिस्सों में कौन किस समय अंदर आया या बाहर गया, और उनकी मौत से पहले की घटनाओं की टाइमलाइन तय करना है.
जांचकर्ता ट्विशा के आखिरी घंटों का एक सिम्युलेटेड विजुअलाइजेशन बनाने के लिए सर्विलांस कैमरों के टाइमस्टैम्प को फोन गतिविधि और इंटरनेट के इस्तेमाल के साथ भी सिंक्रनाइज कर रहे हैं.
टनल व्यू विश्लेषण के जरिए एजेंसी को उम्मीद है कि वह समय के महत्वपूर्ण अंतरालों, संदिग्ध गतिविधियों, गवाहों के बयानों में विसंगतियों और घटना के बाद सबूतों के साथ छेड़छाड़ के किसी भी संभावित प्रयास की पहचान कर पाएगी.
सूत्रों ने बताया कि यह डिजिटल पुनर्निर्माण जांचकर्ताओं को यह तय करने में मदद कर सकता है कि जिस रात ट्विशा की मौत हुई, उस रात क्या कोई जबरदस्ती, साजिश या अपराध स्थल के साथ जानबूझकर कोई छेड़छाड़ की गई थी.