बेंगलुरु: बेंगलुरु की एक महिला की मजेदार सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों तेजी से वायरल हो रही है. इस पोस्ट में उन्होंने भारतीय अपार्टमेंट सोसायटियों की तुलना 'संप्रभु देशों' यानी स्वतंत्र राष्ट्रों से की है. उनके इस व्यंग्यात्मक अंदाज ने न केवल लोगों को हंसाया बल्कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी RWA की भूमिका और उनके कामकाज को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है.
दीपिका जयकिशन नाम की एक्स यूजर ने लिखा कि भारतीय अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स अब केवल रहने की जगह नहीं रह गए हैं, बल्कि वे अपने आप में छोटे-छोटे देश बन चुके हैं. उन्होंने मजाक में कहा कि यहां अपनी सरकार, विपक्ष, नौकरशाही, कानून व्यवस्था और यहां तक कि व्हाट्सएप पर चलने वाली संसद भी होती है.
At this point, Indian apartment complexes aren't residential communities.
— Dipika Jaikishan (@dipikajaikishan) June 17, 2026
They're sovereign nations.
They have their own government, opposition parties, bureaucracy, law enforcement, and a Parliament that meets exclusively on WhatsApp.
There are elections. There is…
दीपिका ने अपने पोस्ट में लिखा कि कई सोसायटियों में सालों पुरानी राजनीतिक दुश्मनियां देखने को मिलती हैं, जिनकी शुरुआत कभी किसी छोटे से विवाद से हुई होती है. उन्होंने कहा कि RWA अध्यक्ष की पहचान कई बार स्थानीय विधायकों से भी ज्यादा होती है. लोग भले ही राज्य चुनावों में वोट न डालें, लेकिन सोसायटी के कोषाध्यक्ष या अन्य पदों के चुनाव को लेकर हफ्तों तक बहस करते रहते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि सोसायटी के लगभग हर मुद्दे को संवैधानिक संकट की तरह लिया जाता है. चाहे मामला पालतू कुत्तों का हो, पार्किंग का, फायर एग्जिट का, गैस पाइपलाइन का या फिर स्विमिंग पूल के समय का, हर विषय पर लंबी और गंभीर चर्चा होती है. कई बार ऐसा लगता है जैसे कोई शांति समझौता तय किया जा रहा हो, जबकि वास्तव में चर्चा मेंटेनेंस शुल्क या सामान्य नियमों को लेकर होती है.
पोस्ट के अंत में दीपिका ने लिखा कि लोकतंत्र की असली भावना अभी भी जिंदा है लेकिन उसने अपना ठिकाना गेटेड कम्युनिटीज में बना लिया है. उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर काफी पसंद की जा रही है.
एक यूजर ने लिखा कि असली भारत RWA के व्हाट्सएप ग्रुप और लोगों के व्हाट्सएप स्टेटस में दिखाई देता है. वहीं दूसरे यूजर ने इसे पंचायत राज का आधुनिक रूप बताया. कुछ लोगों ने कहा कि समाज में जो राजनीतिक संस्कृति दिखाई देती है, उसका प्रतिबिंब इन सोसायटियों में भी नजर आता है.