रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल शादी का प्रस्ताव देना या किसी लड़की का हाथ पकड़ना अपने आप में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस धारा के तहत दोष सिद्ध करने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी की मंशा महिला की लज्जा भंग करने या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की थी.
यह फैसला जस्टिस राजेश कुमार की एकल पीठ ने रामगढ़ जिले के गोला थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया. अदालत ने आरोपी नंदकिशोर बेदिया उर्फ गुड्डू की अपील स्वीकार करते हुए विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा 22 अगस्त 2023 को सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले और 28 अगस्त 2023 के सजा आदेश को रद्द कर दिया.
मामले के अनुसार वर्ष 2017 में एक नाबालिग बच्ची स्कूल से घर नहीं लौटी थी. शिकायत के अनुसार आरोपी ने उससे शादी का प्रस्ताव रखा था और उसका हाथ पकड़कर अपने साथ ले जाने की कोशिश की थी. अगले दिन बच्ची को उसकी मां और ग्रामीणों ने वापस लाया. इसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत मामला दर्ज किया था.
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को धारा 354 के तहत दोषी ठहराया था, जबकि पॉक्सो अधिनियम की धारा 8 के आरोप से बरी कर दिया था. आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया. अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने अश्लील हरकत की या उसकी आपराधिक मंशा महिला की लज्जा भंग करने की थी. अदालत ने कहा कि केवल शादी का प्रस्ताव देना और हाथ पकड़ना, बिना किसी अश्लील या आपराधिक उद्देश्य के, धारा 354 के अपराध को स्वतः सिद्ध नहीं करता.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि धारा 354 के तहत दोष सिद्ध करने के लिए आरोपी की आपराधिक मंशा या महिला की गरिमा भंग करने के इरादे का स्पष्ट प्रमाण होना आवश्यक है. इसी आधार पर अदालत ने आरोपी की दोषसिद्धि और सजा को निरस्त कर दिया. सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि आरोपी अपनी सजा पूरी कर पहले ही जेल से रिहा हो चुका है.