रांची: झारखंड सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत मुफ्त राशन योजना में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 लाख से अधिक अपात्र राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की जांच में ऐसे कई लोग सामने आए, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद मुफ्त राशन का लाभ ले रहे थे. इनमें आयकरदाता, बड़े जीएसटी कारोबार वाले कारोबारी और कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स तक शामिल हैं.
विभाग के अनुसार पिछले छह से सात महीनों में आठ अलग अलग श्रेणियों के करीब 10.06 लाख राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं. विभाग की जांच अभी भी जारी है और फिलहाल 22 लाख से अधिक राशन कार्डधारकों की पात्रता की जांच की जा रही है.
जांच में सामने आया कि 25 लाख रुपये से अधिक जीएसटी टर्नओवर वाले कई लाभार्थियों ने भी राशन कार्ड बनवा रखे थे. इसी तरह छह लाख रुपये या उससे अधिक आय पर आयकर रिटर्न भरने वाले कई लोग भी मुफ्त राशन का लाभ ले रहे थे. विभाग ने ऐसे लाभार्थियों के राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं क्योंकि वे एनएफएसए के तहत पात्र नहीं माने जाते.
सरकार की कार्रवाई में कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स भी शामिल हैं. केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर 4,704 ऐसे लोगों की पहचान की गई, जो विभिन्न कंपनियों के निदेशक हैं और फिर भी राशन योजना का लाभ ले रहे थे. इनके राशन कार्ड भी निरस्त कर दिए गए. इस श्रेणी में सबसे अधिक मामले धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पलामू और गिरिडीह जिलों से सामने आए.
विभाग ने उन राशन कार्डों पर भी कार्रवाई की, जिनके लाभार्थियों के मृत्यु प्रमाण पत्र पहले ही जारी हो चुके थे. ऐसे 2.54 लाख संदिग्ध मामलों में से लगभग 96 प्रतिशत राशन कार्ड रद्द कर दिए गए. इसके अलावा छह महीने से राशन नहीं लेने वाले साइलेंट कार्डधारकों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्ड निरस्त किए गए.
जांच के दौरान एक से अधिक राशन कार्ड रखने वाले लाभार्थियों की भी पहचान की गई. ऐसे मामलों में पाया गया कि कुछ लोगों का नाम या आधार नंबर एक से अधिक राशन कार्डों में दर्ज था, जिनमें अन्य राज्यों के कार्ड भी शामिल थे. विभाग ने इन डुप्लीकेट कार्डों को भी रद्द कर दिया.
भूमि सीमा से अधिक संपत्ति रखने वाले लाभार्थियों और दोपहिया वाहन रखने वाले कई लोगों को भी जांच के बाद अपात्र घोषित किया गया. विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य केवल गरीब, भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाना है. इसलिए जो लोग निर्धारित पात्रता से बाहर पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी.