दिल्ली में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया के बीच बड़े नामों को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक SIR के दौरान नोटिस पाने वाले अधिकांश प्रमुख मतदाताओं के रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन पूरा कर लिया गया है. जांच के बाद इन मतदाताओं के नाम अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं.
नोटिस पाने वाले प्रमुख नामों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शामिल थे. अधिकारियों के अनुसार इन लोगों समेत कई प्रमुख मतदाताओं के रिकॉर्ड में ऐसी विसंगतियां मिली थीं, जिनके कारण उनसे दस्तावेज और जानकारी का सत्यापन कराया गया.
दिल्ली में SIR के तहत 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी. इसमें 97 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल थे. इसके बाद बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई जिनकी जानकारी पुराने रिकॉर्ड से पूरी तरह मैच नहीं हो रही थी. अधिकारियों के मुताबिक कई मामलों में मौजूदा मतदाता विवरण का 2002 में हुए पिछले SIR के रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाया. इसी तरह की विसंगतियों के कारण प्रमुख हस्तियों समेत बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए.
इस प्रक्रिया में किसी व्यक्ति को केवल इसलिए अलग से निशाना नहीं बनाया गया क्योंकि वह VVIP या सार्वजनिक जीवन की प्रमुख हस्ती है. चुनाव अधिकारियों ने बताया कि रिकॉर्ड में चिन्हित विसंगतियों के आधार पर नोटिस जारी किए गए थे.
नोटिस जारी होने के बाद निर्वाचन अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों की टीमों ने कई प्रमुख मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की. अधिकारियों ने घर जाकर आवश्यक दस्तावेजों और चुनाव आयोग की ओर से तय प्रक्रिया के आधार पर जानकारी का सत्यापन किया. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद अधिकांश प्रमुख मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित कर लिए गए हैं. इसका मतलब है कि उनके नाम को अंतिम सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है.
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने पहले ही स्पष्ट किया था कि SIR के दौरान नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा. नोटिस का उद्देश्य मतदाता के रिकॉर्ड में मिली विसंगति को दूर करना और जरूरी दस्तावेजों के आधार पर पात्रता की जांच करना है. किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना जरूरी है.
यानी आडवाणी, जयशंकर, धनखड़, रेखा गुप्ता और केजरीवाल जैसे प्रमुख नामों को नोटिस मिलने को सीधे तौर पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने की कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.