नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह धमाका योजनाबद्ध आत्मघाती हमले का हिस्सा था, लेकिन बम गलत तरीके से तैयार किया गया था. अगर विस्फोटक पूरी तरह विकसित होता, तो तबाही और भी ज्यादा होती.
फॉरेंसिक टीमों ने शुरुआती जांच में पाया कि कार में रखा गया इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी IED अधूरा था. यही वजह रही कि धमाके से बड़ा गड्ढा नहीं बना और न ही छर्रों के टुकड़े बरामद हुए. पुलिस अधिकारी ने बताया कि IED को गलत तरीके से बनाया गया था, जिससे उसका प्रभाव सीमित रहा. बम समय से पहले फट गया और पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया.
पुलिस ने बताया कि फरीदाबाद में हुई रेड और मॉड्यूल के सदस्यों की गिरफ्तारी की खबर सुनकर संदिग्ध उमर घबरा गया था. वह अपनी कार से लगातार लोकेशन बदल रहा था. इसी दौरान बम समय से पहले फट गया. अधिकारी ने कहा, 'संभावना है कि यह हमला आत्मघाती मिशन का हिस्सा था, लेकिन तकनीकी गलती के चलते यह खुद उसके लिए घातक साबित हुआ.'
जांच एजेंसियों ने बताया कि यह धमाका जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले डॉक्टर उमर उ नबी ने किया था. शुरुआती रिपोर्ट्स में माना गया था कि कार में तीन लोग सवार थे, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उमर अकेला था. वह फरार चल रहा था और फरीदाबाद में अपने सहयोगियों की गिरफ्तारी की खबरों को इंटरनेट पर ट्रैक कर रहा था. पुलिस को उसके मोबाइल और लैपटॉप से कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं.
पुलिस के पास उमर के मूवमेंट की 11 घंटे की ट्रैकिंग रिपोर्ट है. सूत्रों ने बताया कि विस्फोटक पदार्थ अमोनियम नाइट्रेट जैसा प्रतीत होता है. जांच में यह भी सामने आया है कि उमर की कार में वही हथियार और सामग्री पाई गई है जो पहले फरीदाबाद के टेरर मॉड्यूल से बरामद हुई थी.
फरीदाबाद मॉड्यूल में पहले गिरफ्तार किए गए डॉक्टर मुजम्मिल और डॉ. शाहीन शाहिद से भी इस मामले में पूछताछ जारी है. अधिकारियों का मानना है कि लाल किला धमाका उसी नेटवर्क से जुड़ा है. सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि उमर का मकसद दिल्ली में किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देना था या विस्फोट केवल आकस्मिक था.
फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने बताया कि बम की अस्थिर संरचना के कारण विस्फोट का असर सीमित रहा. अगर यह पूरी तरह सक्रिय होता, तो आसपास की कई इमारतें और दर्जनों लोगों की जान जा सकती थी. एनआईए और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जांच संयुक्त रूप से कर रही हैं.