रायपुर: मई की गर्म दोपहर के बीच छत्तीसगढ़ में इस बार एक नई प्रशासनिक पहल ने लोगों का ध्यान खींचा है. राज्य सरकार ने सुशासन तिहार 2026 अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य प्रशासन को सीधे आम जनता तक पहुंचाना है. इस पहल के तहत अधिकारी गांव-गांव और शहर के वार्डों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और उनका समाधान मौके पर ही करेंगे. यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चलेगा और पूरे प्रदेश को कवर करेगा.
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. अधिकारी खुद उनके पास पहुंचेंगे. गांवों में पंचायत स्तर पर और शहरों में वार्डों के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में समस्याओं को दर्ज करने के साथ-साथ तुरंत कार्रवाई भी की जाएगी. इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
सीएम विष्णु देव साय ने इस पहल को सुशासन की असली परीक्षा बताया है. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए. उनके अनुसार, प्रशासन की पहचान तभी बनेगी जब लोगों को उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान मिलेगा.
अभियान के तहत राजस्व मामलों जैसे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन को प्राथमिकता दी गई है. इसके साथ ही मनरेगा मजदूरी, प्रमाण पत्र और बिजली-पानी जैसी मूलभूत समस्याओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. हर आवेदन को अधिकतम एक महीने के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है.
इस पहल को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है. मंत्री, सांसद और विधायक समय-समय पर शिविरों का निरीक्षण करेंगे. इससे न केवल काम की निगरानी होगी, बल्कि लोगों को अपनी बात सीधे रखने का मौका भी मिलेगा.
मुख्यमंत्री स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे और ग्रामीणों के साथ सीधे संवाद करेंगे. चौपाल के जरिए लोगों की समस्याएं सुनी जाएंगी और मौके पर समाधान की दिशा तय होगी. इससे प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी.