राजधानी दिल्ली में प्लास्टिक प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए एक नई पहल की शुरुआत हुई है. नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने किआ इंडिया और इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (IPCA) के सहयोग से प्रोजेक्ट डी.आर.ओ.पी. का शुभारंभ किया. यह अभियान प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण की व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करने पर केंद्रित है. इस पहल का उद्देश्य केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदार बनाना भी है.
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने इस परियोजना का शुभारंभ करते हुए पुनर्चक्रित प्लास्टिक से बने विशेष सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया और संग्रहण वाहन को रवाना किया. इसके साथ ही एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे के व्यवस्थित संग्रह और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई. कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बाजार संघों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के सदस्य भी मौजूद रहे. इस पहल को राजधानी में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि इससे प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए मजबूत आधार तैयार होगा.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि एनडीएमसी के लिए यह विशेष महत्व का विषय है क्योंकि स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत भी इसी क्षेत्र की वाल्मीकि बस्ती से हुई थी. उन्होंने कहा कि संसद, केंद्रीय मंत्रालयों और विदेशी दूतावासों जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की मौजूदगी के कारण एनडीएमसी की हर पहल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेश देती है. चहल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव का आधार बनते हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि डी.आर.ओ.पी. परियोजना स्वच्छ भारत, मिशन लाइफ और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभाएगी.
एनडीएमसी और आईपीसीए पिछले कई वर्षों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं. इस सहयोग के तहत बड़ी मात्रा में जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण और कम्पोस्ट उत्पादन किया गया है. अब डी.आर.ओ.पी. परियोजना के माध्यम से प्लास्टिक कचरे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके अंतर्गत अलग-अलग स्थानों पर विशेष संग्रहण डिब्बे लगाए जाएंगे और कचरे को अधिकृत पुनर्चक्रण चैनलों तक पहुंचाया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी व्यवस्था तभी सफल हो सकती है जब नागरिक भी सक्रिय रूप से सहयोग करें. इसलिए इस अभियान में जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को प्रमुख स्थान दिया गया है.
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी गंभीर चुनौती है. किआ इंडिया और आईपीसीए के प्रतिनिधियों ने इस पहल को जिम्मेदार व्यवहार और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि यदि नागरिक अपने घरों और बाजारों से प्लास्टिक कचरे का सही पृथक्करण शुरू करें तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि डी.आर.ओ.पी. परियोजना नई दिल्ली को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ देश के अन्य शहरों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल साबित होगी.