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India Daily

क्या खत्म होगा दिल्ली का जल संकट? 7,200 करोड़ रुपये की नई पाइपलाइन योजना से हर साल बचेगा लाखों लीटर पानी

दिल्ली सरकार 7,200 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना पर काम कर रही है. इसका उद्देश्य हरियाणा से आने वाले पानी की बर्बादी रोककर राजधानी में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाना है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
क्या खत्म होगा दिल्ली का जल संकट? 7,200 करोड़ रुपये की नई पाइपलाइन योजना से हर साल बचेगा लाखों लीटर पानी
Courtesy: pinterest

राजधानी दिल्ली में हर गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गंभीर रूप ले लेता है. इसकी बड़ी वजह हरियाणा से आने वाले पानी का रास्ते में भारी मात्रा में रिसाव और बर्बादी है. इस समस्या के समाधान के लिए दिल्ली सरकार ने करीब 7,200 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी पाइपलाइन परियोजना तैयार की है. इस योजना के तहत पुरानी कच्ची नहर की जगह पाइपलाइन बिछाकर पानी सीधे दिल्ली तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है.

पुरानी नहर में हो रहा है भारी नुकसान

दिल्ली को यमुना के अलावा हरियाणा के मुनक गांव से कैरियर लाइन चैनल (CLC) और दिल्ली सब ब्रांच (DSB) के जरिए पानी मिलता है. इनमें डीएसबी एक पुरानी कच्ची नहर है, जिसमें रिसाव, वाष्पीकरण और अवैध निकासी के कारण बड़ी मात्रा में पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है. अधिकारियों के अनुसार, डीएसबी के जरिए आने वाले पानी का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाता है, जबकि पक्की सीएलसी नहर में यह नुकसान करीब 5 प्रतिशत है.

1000 क्यूसेक क्षमता वाली होगी पाइपलाइन

सरकार ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए 1,000 क्यूसेक क्षमता वाली नई पाइपलाइन बनाने की योजना तैयार की है. इस परियोजना का व्यवहार्यता अध्ययन आईआईटी रुड़की से कराया जा रहा है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार पाइपलाइन हरियाणा सरकार बिछाएगी, जबकि इसका पूरा खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी. इससे पानी की बर्बादी में बड़ी कमी आने की उम्मीद है.

102 किलोमीटर लंबे मार्ग से पहुंचेगा पानी

हरियाणा के करनाल जिले के मुनक गांव से शुरू होकर हैदरपुर जल उपचार संयंत्र तक पहुंचने वाली इस जल आपूर्ति प्रणाली की कुल लंबाई करीब 102 किलोमीटर है. इसमें लगभग 17 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली की सीमा में आता है. वर्तमान में सीएलसी के जरिए करीब 600 क्यूसेक और डीएसबी के माध्यम से लगभग 300 क्यूसेक पानी राजधानी तक पहुंचता है. लेकिन रिसाव के कारण करीब 150 क्यूसेक पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है.

पहले भी रहा है दोनों राज्यों के बीच विवाद

दिल्ली और हरियाणा के बीच मुनक नहर के पानी को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है. रिसाव रोकने के लिए बनाई गई सीएलसी नहर के निर्माण में दिल्ली सरकार ने हरियाणा को लगभग 500 करोड़ रुपये दिए थे. वर्ष 2014 में अदालत के निर्देश के बाद हरियाणा ने इस नहर के जरिए दिल्ली को उसके हिस्से का पूरा पानी देना शुरू किया, जिससे द्वारका, बवाना और ओखला के जल शोधन संयंत्रों को लाभ मिला.

जल संकट से राहत की जगी उम्मीद

यदि यह पाइपलाइन परियोजना समय पर पूरी होती है तो दिल्ली में पानी की बर्बादी काफी हद तक कम हो सकती है. इससे राजधानी के लाखों लोगों को गर्मियों में बेहतर पेयजल आपूर्ति मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक पाइपलाइन प्रणाली न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि भविष्य में बढ़ती आबादी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाएगी.