नई दिल्ली: लंबे इंतजार के बाद दिल्लीवासियों को सांस लेने में थोड़ी राहत मिली है. करीब साढ़े तीन महीने यानी 103 दिनों के बाद राजधानी की वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज की गई. औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 192 रहा, जो हालिया बारिश के कारण संभव हो सका. हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह सुधार ज्यादा दिनों तक टिकने वाला नहीं है और प्रदूषण का स्तर फिर बिगड़ सकता है.
शनिवार को दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज की गई. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के अनुसार, इससे पहले 13 अक्टूबर 2025 को राजधानी की हवा इस स्तर पर पहुंची थी. अक्टूबर की शुरुआत में कुछ दिनों के लिए स्थिति संभली थी, लेकिन उसके बाद लगातार प्रदूषण बढ़ता चला गया और हालात गंभीर होते गए.
CREA के आंकड़ों के मुताबिक 14 अक्टूबर 2025 के बाद दिल्ली में प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना रहा. इस दौरान 26 दिन हवा ‘खराब’, 66 दिन ‘बहुत खराब’ और 10 दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेना फेफड़ों और दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है.
हवा की गुणवत्ता में सुधार का मुख्य कारण शुक्रवार को हुई बारिश को माना जा रहा है. यह 2026 की पहली बारिश थी और बीते दो सालों में जनवरी महीने की सबसे ज्यादा बारिश भी रही. इससे तापमान में गिरावट आई और हवा में मौजूद प्रदूषक कण कुछ हद तक साफ हुए. हालांकि शुक्रवार को भी AQI 282 के साथ ‘खराब’ श्रेणी में ही रहा.
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, आने वाले दो दिनों में दिल्ली की हवा फिर ‘खराब’ श्रेणी में रह सकती है. इसके बाद अगले छह दिनों तक वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ के बीच रहने का अनुमान है. इसका मतलब साफ है कि मौजूदा राहत थोड़े समय की ही है.
शनिवार रात अलग-अलग इलाकों में AQI में बड़ा अंतर देखने को मिला. द्वारका स्थित एनएसआईटी क्षेत्र में AQI 97 के साथ सबसे साफ हवा दर्ज हुई, जबकि आनंद विहार में AQI 217 रहा, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है. सीपीसीबी के मुताबिक अधिकांश मॉनिटरिंग स्टेशन ‘मध्यम’ स्तर पर रहे, लेकिन कुछ जगहों पर हालात अभी भी चिंताजनक हैं.