menu-icon
India Daily

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर सख्ती! कैबिनेट ने पास किया 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026', जानें उम्रकैद सहित क्या-क्या हैं प्रावधान

छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026' को मंजूरी दे दी है. यह ताकत, लालच या छल से धर्मांतरण रोकता है. नाबालिग, महिलाओं और SC/ST/OBC के लिए 10-20 साल जेल, सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास का प्रावधान है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर सख्ती! कैबिनेट ने पास किया 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026', जानें उम्रकैद सहित क्या-क्या हैं प्रावधान
Courtesy: ani

छत्तीसगढ़ में अब अवैध धर्मांतरण पर सख्ती बढ़ने वाली है. विष्णु देव साय सरकार ने कैबिनेट बैठक में 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026' के प्रारूप को हरी झंडी दे दी है. इस कानून का मकसद धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए बल, दबाव, लालच या धोखे से होने वाले धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह रोक लगाना है. सरकार का कहना है कि यह विधेयक किसी की आस्था पर हमला नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए है. डिजिटल माध्यमों से होने वाले ऐसे प्रयासों को भी कवर किया गया है.

पूर्व सूचना और पारदर्शिता अनिवार्य

विधेयक के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहे तो उसे जिला मजिस्ट्रेट को पहले सूचना देनी होगी. इस सूचना को सार्वजनिक किया जाएगा, जिस पर 30 दिनों के अंदर कोई भी आपत्ति दर्ज करा सकेगा. अगर कोई पैतृक धर्म में वापस लौटता है तो इसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा. इससे प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनेगी.

कठोर सजा के प्रावधान

अवैध धर्मांतरण पर सजा बहुत सख्त है. सामान्य मामलों में 7 से 10 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना होगा. नाबालिग, महिला या SC/ST/OBC के धर्मांतरण पर 10 से 20 साल की सजा और 10 लाख रुपये जुर्माना लगेगा. सामूहिक धर्मांतरण के लिए 10 साल से आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है. सभी अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे.

कपट और डिजिटल प्रलोभन पर रोक

विधेयक में प्रलोभन, दबाव, धोखा और मिथ्या जानकारी जैसी शब्दों को स्पष्ट परिभाषित किया गया है. डिजिटल प्लेटफॉर्म से होने वाले धर्मांतरण को भी इसमें शामिल किया गया है. ऐसे मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालयों में होगी. सरकार का मानना है कि इससे गरीब और भोले लोगों को निशाना बनाने वाले तत्वों पर प्रभावी अंकुश लगेगा. 

सामाजिक सौहार्द का उद्देश्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह कानून राज्य की सांस्कृतिक एकता और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए जरूरी है. कमजोर वर्गों को लालच या दबाव में धर्म बदलने से बचाने का यह प्रयास है. विधेयक विधानसभा में पेश होने के बाद कानून बनेगा और लागू होगा.