दिल्ली के पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में रहने वाले एक बुजुर्ग NRI दंपती से करीब 14.8 करोड़ की ऑनलाइन ठगी का बड़ा मामला सामने आया है. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन राज्यों से 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. हैरानी की बात यह है कि आरोपी पढ़े-लिखे हैं, जिनमें MBA ग्रेजुएट, CA का छात्र, IT डिप्लोमा होल्डर और एक पुजारी भी शामिल है.
ठगों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर बुजुर्ग महिला को वीडियो कॉल किया. कॉल के दौरान बैकग्राउंड को ऐसा दिखाया गया जैसे वह कॉल पुलिस स्टेशन से की जा रही है. बुजुर्ग महिला को कहा गया कि उनका बैंक अकाउंट मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े केस में फंसा है. इसके बाद उन्हें घर बैठे “डिजिटल जांच” के नाम पर लगातार वीडियो कॉल पर रखा गया, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है.
ठगों ने करीब 17 दिन तक दंपती को डर में रखा. उन्हें कहा गया कि पैसे “RBI द्वारा जांच” के लिए तय खातों में भेजने होंगे. दबाव और डर के कारण दंपती ने अपनी एफडी तुड़वाकर कई बार में पैसे ट्रांसफर कर दिए. बाद में कॉल अचानक बंद हो गई और पूरा पैसा गायब हो चुका था.
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग राज्यों से हैं और सोशल मीडिया के जरिए जुड़े थे. ये लोग म्यूल अकाउंट्स यानी दूसरों के नाम पर बने खातों का इस्तेमाल कर पैसे आगे भेजते थे. पुलिस ने मोबाइल फोन, चेकबुक और बैंक दस्तावेज भी जब्त किए हैं. इस नेटवर्क के तार नेपाल और कंबोडिया तक जुड़े होने की आशंका है.
डिजिटल अरेस्ट का यह मामला अकेला नहीं है. देश के अलग-अलग शहरों में बुजुर्गों को पुलिस, CBI, NIA या कोर्ट के नाम पर डराकर ठगा जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है.
सरकार और पुलिस ने साफ कहा है कि कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है. अगर ऐसा कोई कॉल आए तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें.