रायपुर: छत्तीसगढ़ में इंसानियत और आपसी सहयोग की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है. कोरबा से बिहार के पटना जा रही एक निजी बस में सफर के दौरान गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. बस उस समय अंबिकापुर पार कर बलरामपुर की ओर बढ़ रही थी. जंगल के बीच रात के समय उत्पन्न इस आपात स्थिति में बस में मौजूद यात्रियों ने हिम्मत और सूझबूझ का परिचय देते हुए महिला का सुरक्षित प्रसव कराया. नवजात के जन्म के बाद यात्रियों ने इलाज के लिए आपस में चंदा जुटाकर नौ हजार रुपये भी दिए.
जानकारी के अनुसार घटना सोमवार देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे की है. कोरबा निवासी सुनती देवी अपने पति के साथ बिहार स्थित ससुराल जा रही थीं. यात्रा के दौरान अचानक उन्हें तेज प्रसव पीड़ा होने लगी. स्थिति को गंभीर देखते हुए बस चालक ने तुरंत बस को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर रोक दिया ताकि महिला की मदद की जा सके.
बस में यात्रा कर रही महिला यात्री सुनीता बाई और अन्य महिलाओं ने बिना किसी चिकित्सीय संसाधन के साहस दिखाते हुए प्रसव की जिम्मेदारी संभाली. सीमित साधनों के बावजूद करीब आधे घंटे के प्रयास के बाद महिला ने एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया. जैसे ही नवजात के रोने की आवाज बस में गूंजी, सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली और खुशी का माहौल बन गया.
प्रसव के बाद यात्रियों को पता चला कि दंपती आर्थिक रूप से कमजोर है और उनके पास अस्पताल में इलाज तथा अन्य जरूरी खर्च के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं. इसके बाद बस में मौजूद सभी यात्रियों ने स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग किया. कुछ ही मिनटों में लगभग नौ हजार रुपये की राशि एकत्र हो गई, जिसे महिला और उसके परिवार को सौंप दिया गया ताकि इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो.
इसके बाद बस चालक ने बिना देर किए बस को बलरामपुर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल में मां और नवजात को भर्ती कर उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया. डॉक्टरों की निगरानी में दोनों का उपचार शुरू किया गया. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मां और नवजात दोनों की हालत स्थिर बताई गई है.