रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि उनके बच्चों को अलग अलग कारणों का हवाला देकर प्रवेश देने से मना कर दिया गया. किसी छात्र के कम अंक को वजह बताया गया, तो किसी से कहा गया कि बच्चा पढ़ाई में कमजोर है. वहीं एक मामले में प्रवेश से पहले दो से 25 तक पहाड़ा याद करके आने और टेस्ट पास करने की शर्त रखने का भी आरोप लगाया गया है.
मामले के अनुसार कुछ परिवार अपने बच्चों का निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में दाखिला कराने पहुंचे थे. आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्होंने सरकारी स्कूल का विकल्प चुना, लेकिन उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने विभिन्न कारण बताते हुए प्रवेश देने से मना कर दिया.
शांति नगर निवासी ललिमा ध्रुव ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी चांदनी को कक्षा 10 में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया. उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन ने नौवीं कक्षा में कम अंक आने का हवाला दिया. शिकायत के बाद दोबारा स्कूल पहुंचने पर भी उन्हें निराशा हाथ लगी. ललिमा ध्रुव ने बताया कि उनके पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका है और वह घरों में काम करके परिवार का पालन पोषण करती हैं. उनका कहना है कि वह अपनी बेटी की पढ़ाई किसी भी हाल में जारी रखना चाहती हैं.
एक अन्य अभिभावक हेमलता यादव ने भी इसी तरह का आरोप लगाया. उनका कहना है कि उनकी बेटी श्वेता यादव को यह कहते हुए प्रवेश नहीं दिया गया कि उसके अंक कम हैं और वह पढ़ाई में कमजोर है. परिवार का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण पहले ही दो बच्चों की पढ़ाई छूट चुकी है और अब वे चाहते हैं कि कम से कम श्वेता अपनी शिक्षा पूरी कर सके.
गुढ़ियारी स्थित एक सरकारी स्कूल से भी ऐसा ही मामला सामने आया. अभिभावक यशोदा महानंद का आरोप है कि उनके बेटे के प्रवेश से पहले स्कूल ने एक सप्ताह का समय दिया और दो से 25 तक पहाड़ा याद करने के बाद टेस्ट देने को कहा. उनका कहना है कि यदि बच्चों को पहले से सब कुछ आना ही चाहिए, तो फिर स्कूल की भूमिका क्या रह जाएगी.
इन आरोपों के सामने आने के बाद रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी एम. जी. सतीश ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र का प्रवेश केवल कम अंक होने के आधार पर नहीं रोका जा सकता. उन्होंने कहा कि यदि किसी स्कूल में ऐसा किया गया है तो संबंधित प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. साथ ही पूरे मामले की जांच कराने का भी आश्वासन दिया गया है.
निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद प्राचार्यों पर बढ़े दबाव का असर अब प्रवेश प्रक्रिया पर दिखाई देने लगा है. उन्होंने निष्पक्ष जांच और जरूरतमंद छात्रों को समय पर प्रवेश दिलाने की मांग की है.