छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सामने आए एक मामले ने गरीब और जरूरतमंद मजदूर परिवारों से जुड़े एक कथित नेटवर्क की जांच का रास्ता खोल दिया है. पुलिस को इस मामले की जानकारी तब मिली, जब 15 साल की एक नाबालिग के गर्भवती होने और उसके साथ शारीरिक शोषण की सूचना सामने आई. इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को मजदूर परिवारों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजे जाने की जानकारी मिली.
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में मजदूर परिवारों को पहले कुछ हजार रुपये एडवांस दिए जाते थे. इसके बाद उन्हें कर्ज के दबाव में रखा जाता था और काम के लिए दूसरे राज्यों के ईंट भट्ठों पर भेजा जाता था. जांच में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और गुजरात तक मजदूरों को भेजे जाने की जानकारी सामने आई. नाबालिग भी अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर गई थी.
मामले की जांच 21 सितंबर को मिले एक मेडिकल मेमो के बाद शुरू हुई. पुलिस को पता चला कि 15 साल की नाबालिग गर्भवती है और उसके साथ शारीरिक शोषण हुआ है. पुलिस ने जब पूरे मामले की पड़ताल शुरू की तो मजदूर परिवारों को रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई. इसी दौरान नाबालिग के उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठे पर पहुंचने की बात भी जांच में सामने आई.
पुलिस के मुताबिक, नाबालिग को उसके परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के एक ईंट भट्ठे पर भेजा गया था. आरोप है कि वहां काम करने वाले एक जेसीबी चालक ने नाबालिग का शारीरिक शोषण किया. इसके बाद वह गर्भवती हो गई. मेडिकल मेमो के जरिए मामला सामने आने के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की और जांच का दायरा बढ़ाया.
जांच के दौरान महासमुंद पुलिस को नेटवर्क के ओडिशा तक फैले होने के सुराग मिले. इसके बाद पुलिस ने 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद बरामद किए गए. इसके अलावा नोट गिनने की मशीन, मजदूरों के पलायन से जुड़े रिकॉर्ड वाली डायरियां और रजिस्टर, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, बंधक स्टांप और अन्य दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे.
पुलिस ने मामले में पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है. महासमुंद के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के अनुसार, खल्लारी थाने में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है. जांच को आगे बढ़ाते हुए मामले में BNS की धारा 111 भी जोड़ी गई है. अब पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों और बरामद रजिस्टरों की जांच कर रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा सके.