छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के करतला रेंज में चिकनीपाली पहाड पर मई से डेरा डाले हुए 9 हाथियों के झुंड ने अब अपना क्षेत्र बदल लिया है. यह दल पहाडी रास्तों से आगे बढ़ते हुए कोरबा वन मंडल की सीमा पार कर सक्ती जिले के जंगलों में पहुंच गया है.
हाथियों का यह दल फिलहाल सक्ती के पहाडी इलाके में घूम रहा है. लंबे समय से करतला क्षेत्र में इनकी मौजूदगी से परेशान ग्रामीणों और वन विभाग को इनके दूसरी ओर जाने से कुछ राहत मिली है.
कटघोरा वन मंडल के पसान रेंज में हाथियों का बड़ा झुंड लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है. 32 हाथियों का दल तान नदी पार कर पसान बीट के पोड़ीकला जंगल तक पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि पिछले दो दिनों से हाथियों का झुंड आसपास के खेतों में पहुंच रहा है. इस दौरान पककर तैयार धान की फसल को रौंदने से किसानों को नुकसान हो रहा है. फसल बचाने के लिए खेतों में जाने से भी ग्रामीण डर रहे हैं.
पसान क्षेत्र के अलावा तनेरा और बनिया इलाके में दो दंतैल हाथियों की अलग-अलग मौजूदगी भी चिंता का कारण बनी हुई है. इन हाथियों पर फसलों के साथ ग्रामीणों के कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. हाल ही में एक दंतैल हाथी के रिहायशी क्षेत्र में पहुंचकर घर तोड़ने की घटना सामने आई थी. इसके बाद आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है.
हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग की टीमें क्षेत्र में निगरानी और गश्त कर रही हैं. ट्रैकिंग दल हाथियों की स्थिति और उनकी दिशा पर नजर रख रहे हैं. प्रभावित गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को भी सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. वन विभाग ने लोगों से रात में अकेले बाहर नहीं निकलने, जंगल और खेतों की ओर जाने से बचने तथा हाथी दिखाई देने पर उसके पास जाने की कोशिश नहीं करने की अपील की है. किसी भी तरह की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने को कहा गया है.
झुंड से अलग होकर अकेले घूमने वाले हाथियों को आम तौर पर लोनर हाथी कहा जाता है. ऐसे हाथियों की गतिविधियों पर वन विभाग विशेष नजर रखता है, क्योंकि अकेले घूमने के दौरान उनका व्यवहार अप्रत्याशित हो सकता है. इसलिए ग्रामीणों को हाथी दिखाई देने पर दूरी बनाए रखने और खुद से उसे भगाने की कोशिश नहीं करने की सलाह दी गई है.