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सांप काटने से मौत के नाम पर 64 लाख की ठगी, डॉक्टर और वकील समेत 19 गिरफ्तार

बिलासपुर में सांप के काटने से मौत के नाम पर सरकारी मुआवजा लेने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और धोखाधड़ी करने के आरोप में 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
सांप काटने से मौत के नाम पर 64 लाख की ठगी, डॉक्टर और वकील समेत 19 गिरफ्तार
Courtesy: Pinterest

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सांप के काटने से मौत पर मिलने वाले सरकारी मुआवजे में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. पुलिस ने इस मामले में डॉक्टर, दो होमगार्ड, वकील, बैंक कर्मचारी और सरकारी कर्मियों समेत 19 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि गिरोह ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सरकारी दस्तावेज तैयार कर करीब 64 लाख रुपये का मुआवजा धोखाधड़ी से हासिल किया.

पुलिस के अनुसार यह फर्जीवाड़ा नवंबर 2019 से फरवरी 2024 के बीच किया गया. गिरोह ने प्राकृतिक, बीमारी, कैंसर, आत्महत्या और अन्य कारणों से हुई मौतों को सांप के काटने से हुई मौत दिखाया. इसके लिए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी रिकॉर्ड तैयार किए गए. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर रेवेन्यू बुक सर्कुलर 6-4 योजना के तहत सरकारी मुआवजा मंजूर कराया गया.

बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने क्या बताया?

बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बताया कि अब तक इस मामले में 16 एफआईआर दर्ज की गई हैं. पुलिस ने गिरोह के 19 सदस्यों को गिरफ्तार किया है जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.

गिरफ्तार आरोपियों में डॉक्टर प्रियंका सोनी, होमगार्ड रामकुमार पाटनवार, होमगार्ड रामेश्वर भास्कर, कथित सरगना और वकील हीरा प्रसाद खांडेकर, बैंक कर्मचारी कुश कुमार गुप्ता, दिहाड़ी मजदूर गोविंद विश्वकर्मा तथा कई सरकारी कर्मचारी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक अपराध के समय डॉक्टर और दोनों होमगार्ड बिलासपुर के सीआईएमएस अस्पताल में तैनात थे.

जांच में क्या आया सामने?

जांच में सामने आया कि अस्पताल में शव आने की जानकारी होमगार्ड गिरोह तक पहुंचाते थे. इसके बाद वकील मृतकों के परिजनों को सांप के काटने से मौत का दावा करने के लिए तैयार करता था. फिर डॉक्टरों के नाम से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की जाती थी, जिसमें मौत का कारण सांप का काटना बताया जाता था.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस का कहना है कि गिरोह ने दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, पटवारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर भी तैयार किए. कई मामलों में शवों के साथ छेड़छाड़ कर सांप के काटने जैसे निशान भी बनाए गए. इसके बाद मुआवजे की राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जाती थी और बाद में आरोपियों के बीच बांट ली जाती थी.

जांच में अब तक 16 फर्जी मुआवजा दावे सामने आए हैं, जिनमें लगभग 64 लाख रुपये का भुगतान हुआ. पुलिस के अनुसार प्रत्येक लाभार्थी को करीब 50 हजार रुपये दिए जाते थे जबकि बाकी रकम गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे.

छापेमारी के दौरान पुलिस ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, सरकारी मुहरें, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज, कंप्यूटर, प्रिंटर, नकदी और अन्य महत्वपूर्ण सामान बरामद किया है. पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य सरकारी कर्मचारियों और लाभार्थियों की पहचान कर रही है.