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बिहार में सख्त हुआ निवेश का नियम, नीतीश सरकार ने 1426 करोड़ प्रस्तावों को दिखाई 'लाल झंडी'; 48 परियोजनाएं स्टेज 1 में ही खारिज

बिहार सरकार ने 1426 करोड़ रुपये के 48 निवेश प्रस्तावों को शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया है. उद्योग विभाग की समीक्षा में पाया गया कि कई कंपनियां जरूरी जानकारी नहीं दे रही थीं या नीति की शर्तों को पूरा नहीं कर पा रही थीं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
बिहार में सख्त हुआ निवेश का नियम, नीतीश सरकार ने 1426 करोड़ प्रस्तावों को दिखाई 'लाल झंडी'; 48 परियोजनाएं स्टेज 1 में ही खारिज
Courtesy: @CMBiharNK x account

पटना: उद्योग विभाग के रिव्यू के बाद बिहार सरकार ने स्टेज 1 पर कुल 48 प्रोजेक्ट्स को रिजेक्ट कर दिया है. इससे राज्य में मिले Rs 1,426 करोड़ के इन्वेस्टमेंट प्रपोजल खत्म हो जाएंगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फैसला स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन काउंसिल की मीटिंग में लिया गया, जहां प्रपोजल की गंभीरता और पात्रता की जांच की गई. 

सरकार का कहना है कि कई प्रपोजल तय स्टैंडर्ड को पूरा नहीं कर रहे थे और इसलिए उन्हें आगे मंजूरी नहीं दी गई. इस फैसले से साफ है कि बिहार में इन्वेस्टमेंट का स्वागत है, लेकिन सिर्फ उन्हीं प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जाएगा जो पॉलिसी के हिसाब से हों और जिनमें आगे बढ़ने की संभावना हो.

किन - किन सेक्टर्स के प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा असर?

सरकार ने जिन प्रपोजल्स को रिजेक्ट किया, वे अलग-अलग इंडस्ट्रियल सेक्टर्स से जुड़े थे. इनमें फूड प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, प्लास्टिक और रबर, सोलर एनर्जी, टेक्सटाइल और वुडवर्किंग जैसे सेक्टर्स शामिल थे.

किस सेक्टर पर पड़ेगा ज्यादा असर?

फूड प्रोसेसिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा. इस सेक्टर के 27 प्रोजेक्ट्स रिजेक्ट कर दिए गए, जिनमें लगभग ₹1,241 करोड़ के इन्वेस्टमेंट का प्रपोजल था. इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग के पांच, प्लास्टिक और रबर के सात, हेल्थकेयर के तीन और नॉन-कन्वेंशनल एनर्जी के दो प्रोजेक्ट्स को भी लिस्ट से हटा दिया गया. सरकार का मानना ​​है कि इन्वेस्टमेंट प्रपोजल्स की क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था.

किसके खिलाफ होगा एक्शन?

उद्योग विभाग के मुताबिक ज्यादातर प्रपोजल्स इसलिए रिजेक्ट किए गए क्योंकि इन्वेस्टर्स जरूरी जानकारी नहीं दे पाए. रिव्यू के दौरान यह पाया गया कि इन्वेस्टर्स से बार-बार जानकारी मांगने के बावजूद 48 में से 42 प्रपोजल्स इनएक्टिव थे. सरकार ने कहा कि जब इन्वेस्टर किसी प्रोजेक्ट में एक्टिव रूप से शामिल नहीं होते हैं, तो उसे आगे बढ़ाना नामुमकिन होता है. इसलिए ऐसे प्रपोजल तुरंत रिजेक्ट कर दिए गए.

रिव्यू के दौरान यह भी पता चला कि चार इन्वेस्टर ने अपनी मर्जी से अपने प्रपोजल वापस लेने की रिक्वेस्ट की थी. इसके अलावा दो प्रपोजल बिहार इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2016 के एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा नहीं कर पाए. ऐसे मामलों में भी प्रपोजल को मंजूरी नहीं दी गई. सरकार ने साफ कर दिया है कि पॉलिसी के नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

इन्वेस्टमेंट को लेकर क्या है सरकार का मैसेज?

इंडस्ट्री डिपार्टमेंट ने हाल के महीनों में पेंडिंग और इनएक्टिव इन्वेस्टमेंट प्रपोजल का पूरा रिव्यू शुरू किया है. राज्य सरकार का मकसद कागज पर पड़े प्रपोजल के बजाय असली इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना है. सरकार का कहना है कि जो सीरियस इन्वेस्टर सभी क्राइटेरिया को पूरा करते हैं, उन्हें हर मुमकिन सुविधा दी जाएगी.