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Keralam Exit Poll: कांग्रेस को मिला केरलम की जनता का साथ, LDF एक दशक बाद सत्ता से बाहर

केरलम विधानसभा चुनाव के एआई एग्जिट पोल ने राज्य में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर की भविष्यवाणी की है. अनुमानों के अनुसार, कांग्रेस नीत यूडीएफ पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ रहा है, जबकि पिनाराई विजयन की एलडीएफ सरकार की विदाई संभव है.

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Keralam Exit Poll: कांग्रेस को मिला केरलम की जनता का साथ, LDF एक दशक बाद सत्ता से बाहर
Courtesy: India Daily

केरलम की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को हुई मतदान की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब सबकी नजरें 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं. इस बार राज्य में करीब 78 प्रतिशत की बंपर वोटिंग दर्ज की गई है, जिसके राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं. 'इंडिया डेली' के एआई एग्जिट पोल ने केरलम के सियासी भविष्य को लेकर जो संकेत दिए हैं, वे सत्ता पक्ष के लिए चिंताजनक और विपक्ष के लिए उत्साहजनक हैं. पिछले एक दशक से सत्ता में काबिज वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) को इस बार कड़ी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है.

एआई एग्जिट पोल के ताजा आंकड़े एलडीएफ के अभेद्य किले में बड़ी सेंध लगने की ओर इशारा कर रहे हैं. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला मोर्चा इस बार 60-73 सीटों के बीच सिमटता हुआ नजर आ रहा है. मई 2016 से लगातार शासन कर रहे वामपंथियों के लिए इस बार वापसी की राह अत्यंत कठिन बताई जा रही है. दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ 65-77 सीटों पर बढ़त बनाता दिख रहा है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े के काफी करीब है. यह जीत कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगी.

वोट प्रतिशत में यूडीएफ का दबदबा 

मतदान के रुझान स्पष्ट करते हैं कि यूडीएफ के पक्ष में करीब 40-47 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. वहीं एलडीएफ पर भरोसा जताने वाले मतदाताओं का प्रतिशत 37-43 के बीच रहने का अनुमान है. यह करीब 4 प्रतिशत का वोट स्विंग ही सीटों के गणित में बड़ा बदलाव लाने वाला है. भारी मतदान को लेकर विश्लेषकों का मानना है कि जनता ने इस बार पारंपारिक नीतियों के बजाय बदलाव के लिए वोट किया है. 

बीजेपी की पैठ और चुनावी परिणाम 

केरलम की राजनीति में अपनी जड़ें गहराई से जमाने की कोशिश कर रही बीजेपी के लिए परिणाम इस साल भी बहुत उत्साहजनक नहीं रहने वाले हैं. एआई एग्जिट पोल के अनुसार, पार्टी मात्र 1-5 सीटों के बीच ही सिमट सकती है. हालांकि, पिछले एक दशक में बीजेपी ने दक्षिण के इस राज्य में अपनी वैचारिक पैठ बढ़ाने की पूरी कोशिश की है और राजीव चंद्रशेखर जैसे कद्दावर नेताओं को मैदान में उतारा है, लेकिन यह लोकप्रियता सीटों में तब्दील होती नहीं दिख रही है. अन्य निर्दलीय और छोटे दलों के खाते में 0-3 सीटें जाने का अनुमान है.

मुख्यमंत्री पद के लिए विजयन अब भी पहली पसंद 

दिलचस्प तथ्य यह है कि सत्ता से विदाई के संकेतों के बावजूद व्यक्तिगत लोकप्रियता के मामले में पिनाराई विजयन अभी भी राज्य के सबसे पसंदीदा नेता बने हुए हैं. सर्वे के अनुसार, 34 प्रतिशत लोग उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. उनके मुकाबले यूडीएफ के वीडी सतीशन को 30 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है. अन्य दावेदारों में राजीव चंद्रशेखर (7.5%), केके शैलजा (6.6%) और रमेश चेन्निथला (3.3%) शामिल हैं. यह दिखाता है कि मतदाता मुख्यमंत्री के चेहरे से ज्यादा पार्टी और शासन बदलने के पक्ष में नजर आ रहे हैं.

140 सीटों वाली विधानसभा में जीत का ताज किसके सिर सजेगा, इसका वास्तविक फैसला तो 4 मई को ही होगा. हालांकि एआई एग्जिट पोल के अनुमानों ने यूडीएफ को स्पष्ट बढ़त दी है, लेकिन मतदान के भारी प्रतिशत को देखते हुए किसी भी आकस्मिक परिणाम से इनकार नहीं किया जा सकता. चुनावी आचार संहिता और लोकतांत्रिक नियमों  के तहत अब सभी दल अपनी जीत के दावे कर रहे हैं. 4 मई का दिन तय करेगा कि केरलम की जनता ने किस पर विश्वास जताया है.