Bihar Elections 2025: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को राज्य के स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड स्कीम में बड़ा बदलाव करते हुए घोषणा की है कि अब इस योजना के तहत मिलने वाले शिक्षा ऋण Education Loan पर किसी भी छात्र को ब्याज नहीं देना होगा. यानी अब सभी छात्र-छात्राओं को पूरी तरह ब्याज-मुक्त लोन मिलेगा. यह कदम विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उठाया गया है और इससे हजारों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है.
नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पूर्व ट्विटर पर लिखा , 'मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि अब स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत मिलने वाला शिक्षा ऋण सभी छात्रों के लिए पूरी तरह ब्याज-मुक्त होगा. यह फैसला युवाओं के मनोबल को बढ़ाएगा और उन्हें उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए प्रेरित करेगा.'
सरकार ने सिर्फ ब्याज खत्म नहीं किया है , बल्कि लोन चुकाने के नियम भी आसान बना दिए हैं. 2 लाख तक का लोन लेने वाले छात्रों को अब पहले की तरह 5 साल नहीं , बल्कि 7 साल 84 किस्तों में भुगतान करने की सुविधा मिलेगी. वहीं , 2 लाख से ऊपर के लोन की अदायगी के लिए अब 10 साल 120 किस्तें का समय मिलेगा , जबकि पहले सिर्फ 7 साल की ही मोहलत थी.
इस फैसले से छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव काफी कम होगा और उन्हें लोन चुकाने के लिए ज्यादा समय और लचीलापन मिलेगा.
बिहार में 07 निश्चय योजना के अंतर्गत 12वीं कक्षा उत्तीर्ण छात्र जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं उनके लिए 02 अक्टूबर 2016 से बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लागू है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अधिकतम 04 लाख रुपए का शिक्षा…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) September 16, 2025
यह योजना अक्टूबर 2016 में 'सात निश्चय योजना' के तहत शुरू की गई थी. इसमें इंटर कक्षा (कक्षा 12) पास करने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिलता है. पहले इस पर 4 परसेंट ब्याज सामान्य छात्रों के लिए लिया जाता था. जबकि महिला , दिव्यांग और ट्रांसजेंडर छात्रों को सिर्फ 1 % ब्याज देना पड़ता था. लेकिन अब सभी वर्गों के लिए यह पूरी तरह ब्याज-मुक्त कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री ने कहा , 'हमारा उद्देश्य है कि बिहार का कोई भी छात्र-छात्रा आर्थिक तंगी की वजह से उच्च शिक्षा से वंचित न रहे. यह योजना छात्रों का हौसला बढ़ाएगी और वे पूरी लगन से पढ़ाई कर सकेंगे. इससे न सिर्फ उनका भविष्य सुधरेगा , बल्कि राज्य और देश का भविष्य भी मजबूत होगा.'
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला सिर्फ शिक्षा ही नहीं , बल्कि राजनीति के लिहाज से भी अहम है. चुनावी साल में युवाओं और शिक्षा को प्राथमिकता देने से सरकार सीधा छात्र वर्ग और उनके परिवारों को साधने की कोशिश कर रही है. आने वाले विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है.