बेंगलुरु: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 को 'बहुत निराशाजनक' बताया और इसे दूरदर्शिता की कमी वाला बताया. कलबुर्गी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'कर्नाटक को कुछ नहीं दिया गया है, उन्होंने 'चोंबू' दिया है.
सीएम ने आगे कहा कि उन्होंने पांच साल में बेंगलुरु - हैदराबाद और बेंगलुरु - चेन्नई को जोड़ने वाली दो हाई-स्पीड ट्रेनों का आश्वासन दिया है. हमसे ज्यादा, आन्ध्र प्रदेश, हैदराबाद और चेन्नई के लोगों को इससे फायदा होगा. हम बेंगलुरु को मुंबई, पुणे और मंगलुरु से जोड़ने वाली हाई-स्पीड ट्रेन चाहते थे.'
सिद्धारमैया जिनके पास राज्य में वित्त विभाग भी है, उन्होंने टैक्स बंटवारे में ज्यादा हिस्सेदारी की अपनी पुरानी मांग उठाई. उन्होंने दुख जताया कि कर्नाटक को सिर्फ 41 प्रतिशत मिल रहा है, जबकि उन्होंने वर्टिकल टैक्स बंटवारे में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी मांगी थी.
उन्होंने कहा, 'हमने कम से कम 50 प्रतिशत मांगा था. हालांकि, वे सिर्फ 41 प्रतिशत दे रहे हैं. 14वें वित्त आयोग के अनुसार कर्नाटक को 4.71 प्रतिशत मिला था लेकिन 15वें वित्त आयोग में यह घटकर 3.64 प्रतिशत हो गया. अब यह 4.131 प्रतिशत है. हमने 16वें वित्त आयोग के सामने तर्क दिया कि हमें कम से कम उतना तो मिलना चाहिए जितना 14वें वित्त आयोग में बताया गया था. अगर आप 14वें वित्त आयोग के वादे के बराबर भी नहीं देते हैं, तो यह कर्नाटक के साथ बहुत बड़ा अन्याय है.'
अन्य राज्यों के संबंधित आंकड़ों को भी बताया और कहा हम यह नहीं कह रहे हैं कि आपको दूसरे राज्यों को नहीं देना चाहिए लेकिन हमें भी दीजिए. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बजट में सिंचाई प्रोजेक्ट्स को लेकर राज्य की मांगों को पूरा नहीं किया गया है.
उन्होंने ये भी कहा, 'हमने सिंचाई प्रोजेक्ट्स मांगे थे. इसके बारे में एक चिट्ठी भी नहीं है. हमने तुंगभद्रा योजना, अपर कृष्णा प्रोजेक्ट्स के लिए नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा मांगा था. अपर भद्रा प्रोजेक्ट के लिए, निर्मला सीतारमण ने बजट 2023-24 में 5,300 करोड़ रुपये का भरोसा दिलाया था. तीन साल में एक रुपया भी नहीं दिया गया है. तमिलनाडु की सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज हो गई लेकिन उन्होंने यानी केंद्र सरकार मेकेदातु को मंजूरी नहीं दी है.'
खास तौर पर पिछड़े कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र का जिक्र करते हुए, सिद्धारमैया ने बताया कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद कल्याणा कर्नाटक रीजनल डेवलपमेंट बोर्ड (KKRDB) को 13,000 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है. उन्होंने दुख जताते हुए कहा, 'हम हर साल KKRDB को 5,000 करोड़ रुपये दे रहे हैं और मैचिंग ग्रांट मांगी थी लेकिन उसका कोई जिक्र नहीं है.'