नई दिल्ली: उत्तराखंड के कोटद्वार शहर का मामला इस समय पूरे देश में चर्चे का विषय बना हुआ है. इस मामले में एक मुस्लिम व्यक्ति के दुकान के नाम पर शुरू हुआ छोटा विवाद अब सांप्रदायिक तनाव का रूप लेता जा रहा है. हालांकि इस मामले को लेकर एक स्थानीय युवक दीपक काफी चर्चे में आ गया है. कांग्रेस राहुल गांधी ने दीपक को देश का असली हीरो बताया है.
दीपक एक जिम ट्रेनर है. जैसे ही मुस्लिम व्यक्ति के दुकान के नाम पर विवाद शुरू हुआ वैसे ही वह अकेले बजरंग दल से भिड़ गया. इस दौरान उसने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया हालांकि उसका असली नाम दीपक कुमार है.
रिपोर्ट की मानें तो कोटद्वार शहर में विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपने दुकान का नाम 'बाबा ड्रेस' रखा. बजरंग दल समेत अन्य हिंदू संगठन द्वारा इस पर आपत्ति जताई जान लगी. पहले दुकानदार को नाम बदलने के लिए कहा गया और जब उन्होंने बात नहीं मानी तो और भी कार्यकर्ताओं को इक्ट्ठा कर हंगामा शुरू कर दिया गया. उन्होंने दूसरे धर्म के व्यक्ति को बाबा नाम रखने पर आपत्ति जताई. ऐसे में दीपक अकेले मौके पर पहुंचा और मुस्लिम युवक की ओर से बात करने लगा. जब उससे उसका नाम पूछा गया तो उसने खुद मोहम्मद दीपक बताया. हालांकि देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और पुलिस ने तनाव बढ़ाने के आरोप एक्शन लेते हुए दीपक समेत अन्य तीन स्थानीय लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया.
उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं।
दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं - उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहे हैं।
वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं और यही बात सत्ता को सबसे ज़्यादा चुभती है।
संघ परिवार… pic.twitter.com/c1D4VHV5XO— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 1, 2026Also Read
घटनास्थल पर देखते ही देखते भीड़ जुट गई और शांत भंग करने की कोशिश की जाने लगी. पुलिस का कहना है कि उग्र नारेबाजी के साथ पुलिस बैरियर को हटा दिया गया. इतना ही नहीं 30-40 लोगों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी की. पुलिस के साथ गाली-गलौज भी किया गया और जाति सूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया. इसे प्रशासन ने अति गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच शुरू कर दी.
हालांकि इस मामले पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट लिखा. जिसमें उन्होंने दीपक को भारत का हीरो बताया. उन्होंने लिखा कि दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं. वे नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान लगा रहे हैं.