पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस संगठन को एकजुट रखने की चुनौती का सामना कर रही है. हाल के दिनों में पार्टी के भीतर उभरे मतभेदों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति संभालने के लिए कदम तेज कर दिए हैं. इसी कड़ी में प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल का चंडीगढ़ दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल सोमवार को चंडीगढ़ पहुंचे, जहां वह अगले करीब पांच दिनों तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न गुटों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात करेंगे. इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की स्थिति को समझना और नेताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है. पार्टी नेतृत्व चाहता है कि चुनावी तैयारियों के दौरान किसी भी तरह की आंतरिक असहमति का असर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं तक न पहुंचे. इसलिए नेताओं की राय जानने और उनके सुझावों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया जाएगा.
हाल ही में चुनाव समिति के गठन के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और समर्थकों में असंतोष की चर्चा सामने आई थी. खास तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थकों की नाराजगी को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हुईं. सूत्रों के अनुसार, बघेल अपनी बैठकों की शुरुआत चन्नी और अन्य वरिष्ठ नेताओं से करेंगे. इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ भी बातचीत होगी. इन बैठकों में चुनावी रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा किए जाने की संभावना है.
भूपेश बघेल के दौरे का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पंजाब कांग्रेस की वर्तमान स्थिति का विस्तृत आकलन तैयार करना भी है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न नेताओं से चर्चा के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें राजनीतिक हालात, संगठन की मजबूती, चुनावी चुनौतियां और संभावित रणनीति का उल्लेख होगा. यह रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को सौंपी जाएगी. माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के जरिए पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की दिशा में प्रयास तेज करना चाहती है.